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Friday, December 5, 2014

'गोलू' तुम्हारे लिए




              अगर हथौड़ा होता मेरे पास तो मैं वक़्त तोड़ डालता...एक एक पल रखता और 'धाड़' से करता चकनाचूर... लेकिन मुझे हथौड़ा चलाना नहीं आता और लम्हे भी तो साल्ले कांच के नहीं बने होते!... खैर इतना मुझे पता है कि तुम्हें पढ़ने में दिक्कत होगी और शायद समझने में भी... उतनी ही जितनी कि मुझे कन्नड़ समझने में होती है... लेकिन फिर भी तुम पढोगे... तुम शायद यकीन करो तो मैसूर से जो मैंने पाया है और जो अब तक बचा के अपने पास रखा है उनमें से एक तुम हो. खैर अगर तुम मेरी अच्छी दोस्त नहीं होती तब भी उतनी ही स्वीट होती और उतनी ही अच्छी... जितनी हो. सच कहूँ, तुम्हारे कल के लिए थोड़ा सा डर रहा हूँ. तुम जैसे हो बस मैं हमेशा तुम्हें वैसे ही देखना चाहता हूँ.. बेपरवाह, खुश-दिल और हँसते हुए. शादी मुबारक 'गोलू'. मेरा अभी वहां न होना एक छोटा पल है और कभी मेरा वहां होना एक खूबसूरत लम्हा होगा...

Tuesday, July 15, 2014

लप्रेक (लघु प्रेमकथायें)



         कभी कभी ख़ुदा के कान में बड़ी जोर से चिल्लाने का मन करता है.... लगता है उठा दूँ सोते से. ज़िंदगियाँ लेने से पहले के हिसाब ठीक करे.

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       'उस रात तुम चाँद लग रहे थे...सच कह रहा हूँ... बस मेरे आसमान पे नहीं छाये थे.'  किसी ज़माने में किसी ने लिखा था, महबूब के निकाह को लेकर....सोचता हूँ, उस वक़्त उसके दिल में क्या चल रहा होगा?

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      'तुम नहीं समझोगे, तुमने मोहब्बत नहीं की कभी.' जॉब छोड़ के जाते-जाते वो मुझसे बोलती है..... दो साल बाद- 'इश्क़ करोगे हमसे?' वही है. 'तुम्हें बड़े दिन बाद पता चला कि मैंने भी इश्क़ किया था.' मैं धीरे से उसके कान में फुसफुसाता हूँ.

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    'लड़कियों का संघर्ष तो जन्म के साथ ही शुरू हो जाता है.' वो टूटी-फूटी हिंदी में बोलती है. बड़ा दीर्घ बोल के भी खिलखिला रही है. शायद अबतक कुर्बानियों की आदत हो गयी है.

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    'पता है,अगर मेरी कुछ प्रायोरिटी नहीं होती तो तुमसे मैं शादी कर लेती....यू आर जैम'  वो कहती है.
'मेरी वाली ने भी यही कहा था.' मैं कहता हूँ.
    एक सन्नाटा सा पसर गया है, जिसे कोई तोड़ने की कोशिश नहीं करता.

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    'तुम अपने पहले प्यार से शादी नहीं कर पाते..... गर कर भी लेते हो तो फिर उतना खूबसूरत नहीं बचता.' वो धीरे से कान में कहता है.
   उसकी पत्नी मुस्कुरा रही है. धीरे-धीरे वो मुस्कान मुझे फेक लगने लगती है.
   उसने अपने स्कूल टाइम प्यार से शादी की थी.

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   'सबके अपने-अपने ग़म हैं, तुम भी अपने के साथ जी लो.' आज के दिन की एक और फ़क़त फिलॉसोफी मिलती है.


Tuesday, May 20, 2014

खुद पानी बन जाना




तुम मेरे रास्ते नदी बहा देना,
पानी बन जाना
और डुबा देना नियति को.
ख़ुदा के बनाये तमाम नियमों को धता बता कर
चले आना,
खुद पानी बन जाना,
मेरे रास्ते नदी बहा देना.

लाख टके के कायदे
दो टके में बेच के,
चल देना अपने रस्ते.

लोग पूछें
तो कह देना-
'खुद का काम देखें,
आधी आबादी भूखी है,
खाने का सामान देखें.'

ख़ुदा आये तो पूछ लेना-
'हेडमास्टर था क्या कहीं?'
तमाम नियम बना डाले,
जीने-मरने के.'

खुद का ख़याल रखना,
सवाल तमाम रखना,
रौशनी चुरा लेना,
डर को डरा देना.
फिर पानी बन जाना,
भागीरथी सा बह जाना,
मेरे रास्ते भी नदी बहा देना.


Pic: from explore.org

Saturday, May 4, 2013

Three Noticed Days.





जनवरी 20, 2013, Pune Maharashtra ____


               'प्रदेश  को विकास की ज़रूरत है, लेकिन ये तब तक नहीं होगा जब तक बिहार, उ.प्र. के लोग यहाँ आते रहेंगे.' मेरे सीनियर हैं, पढ़े-लिखे इंजिनियर और कुल नौ साल के करियर में छ: साल यू. एस. ए. में रहे हैं.

                 मैं उनके कॉलेज का नाम पूछ लेता हूँ. वो बड़े गर्व से एक बड़े से इंस्टिट्यूट का नाम बताते हैं. मुझे उनके इस गर्व पे तरस आता है. शायद पढ़ा-लिखा होना और अच्छे कॉलेज से पढना आपके  अक्लमंद होने की निशानी नहीं है. मुझे एसे पढ़े-लिखों से अच्छे अपने गाँव के अनपढ़ पर सीधे-सच्चे लोग ज्यादा अच्छे लगते हैं!

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अप्रैल 21, 2013, Mysore Karnataka ____


         मैं उसके साथ मंदिर गया था, ये मंदिर हमारे यहाँ के मंदिरों से अलग है. देश में हर दो सौ गज़ पे बोली बदलती है तो आस्था भी और पूजा के तरीके भी. फिर देश अपना है, तभी तो घर से 2000 KM दूर भी अपनापन लगता है. मैं आदतन 'मंगलाष्टक' पढने लगता हूँ........ "देखो ये दो-दो लोग किस तरह से भगवान की मूर्ति साफ़ कर रहे हैं. बाहर कोई गिरा पड़ा होता तो उठाते भी नहीं!" वो मूर्ति साफ़ करते पुजारियों को देख बोलती है.

                       मैं उसकी तरफ देखता हूँ, उसके चेहरे पर उन पुजारियों से ज्यादा तेज़ था.

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Today, Mysore Karnataka ____


              कुछ लिखना तो चाहता हूँ तुमपर भी, लेकिन मेरी सबसे अच्छी दोस्त ने कहा है कि उसे नहीं लगता की कभी तुमने मुझसे प्यार किया था..... मुझे भी लगने लगा है की शायद वो सही है.

Wednesday, February 16, 2011

BakBak...2

वो कह रहे हैं 'इश्क की Biology तुम्हें समझ नहीं आएगी, तुम्हें हर दूसरी लड़की से प्यार हो जाता है. मूवी देखने के बाद हीरोइन से भी.' मैं मुसकुराता हूँ.
' मुझे जॉब मिल जाये, मैं Settle हो जाऊंगा, उससे शादी कर लूँगा. उसका बाप भी मानेगा. वैसे भी हर लड़की का बाप विल्लैन होता है.' मैं हाँ में सर हिलाता हूँ. मेरे Senior हैं.
आज फ़ोन बजता है, फ़ोन पर वही सीनिअर हैं. 'यार कैसा है?.... 'ठीक हूँ सर.' ....'कोई नई मिली की नहीं?'.....'नहीं, आपके क्या हाल हैं?  मै'म कैसी हैं?'....'यार हमारा ब्रेक-उप हो गया है. उसने वहीं TCS में ही अपने Colleage से शादी कर ली है. हम दोनों ही स्विच नहीं कर सकते था ना!'.............ये इश्क भी अजीब हो गया है. बिलकुल Fastrack के Ad की तरह. एक Break-up कि दूजी कहानी शुरू. मैं शुरू में B-tech में आकर Pendrive-Pendrive खेलता था. अब सिटी बस का ड्राईवर Pendrive से गाने चलाता है म्यूजिक सिस्टम में. 'क्या करें भैया एक GB की है, इसके पूरे गाने सुन लिए, दूकान बाला 50 रूपये लेता है भरने के, इसलिए नहीं डलवाए. यही बजाने पड़ रहे हैं.'.......'पता एक समय MACT (MANIT) बाले किराया नहीं देते थे बस का. ........मैं मुस्कुराता हूँ, आप Bike नहीं चलाते हैं क्या?....'नहीं'....'क्यूँ?'..'येसे ही.'......'सही है, पिछले साल 65 लड़के मर गये Bike से' मैं कुछ नहीं कहता हूँ. ज़िन्दगी कितनी फास्ट हो गयी है, Racing Bikes और ज़िन्दगी की Race एक सी लगती है. तुम Bike से Race करो और ज़िन्दगी की भी. देखते हैं Bike Race जीतते हो या जिंदगी की Race.
       'तुम्हें करना क्या है?..'पता नहीं'...'एक बार प्लेसमेंट हो जाये तो जो करना हो करना, कांफिडेंस बढ जायेगा.' उनकी मुस्कान का राज आज समझ आता है, अब कांफिडेंस है, लेकिन प्रश्न स्थर है- 'मुझे करना क्या है.?'


PSC कि तैयारी शुरू की है, कुछ प्रश्न आपसे भी-
--' Amazon नदी बड़ी है या Amazon.com Book selling site?'
--'देश का सबसे बड़ा बैंक कौन सा है? RBI या A. रजा (एक्स-टेलिकॉम मिनिस्टर) का घर?'
--'आप क्या पसंद करेंगे,  एक इंजिनियर बनना या सोनिया गाँधी के यहाँ खाना बनाना? इंजिनियर बनने से 40000-50000 महीने कमाएंगे, और सोनिया जी रसोई सम्हालने से राष्ट्रपति बन जायेंगे. (जैसा कि राजस्थान के एक मिनिस्टर ने टिपण्णी की थी.) फैसला आपका.'
--...और सबसे अहम सवाल, कमेंट्स में इसका Answer जरूर दें- ' हमने अंग्रेज शासन में ज्यादा तरक्की कि या स्वतंत्रता के 63 सालों में?'

Friday, February 4, 2011

Aarakshan (film)

Deepika Padukode in my colllege. yup. meine dekha,live!! She is b'ful, but not much, little lesser than my girl friend :))..... from Prakash Jha to Amitabh Bachchan, everyone were present in my college and students were treating them like VVVV......(1000 times) IP special (everyone wanna job Jr. artist in the movie).
seen: Deepika walking in the canteen..
take first-
She walked, one of Jr. artist came between.........cut, retake.

take two-
she walked, but not properly.......cut, retake

take third, fourth ,fifth, sixth, seventh.........

just boring......retake, retak, retake........!!!!!

Bechara mei bhag khada hua (film banana itna aasan nhi hai bidu)........Prakash Jha (director, directing this film 'Arakshan') kaise jhelta hoga!!

There is difference b/w Amitji and others (include Saif Ali, Deepika, Manoj Bajpai ).... the difference in treatment, everyone was (from crew) was treating Amitji as PM and others as AAM AADMI.

watch my college (film ki 40% shooting mere college se hai), watch Aarakshan film in september. :))

I am also in a seen........and my Jrs are in many. ::p

Friday, December 17, 2010

कुछ अधूरे पन्ने......

May 2004....
पापा का हॉस्पिटल भी अजीब है, उसने मौत  को ज़िन्दगी से आगे निकलते देखा  है. जैसे उसे नहीं पता मौत क्या होती है, ज़िन्दगी क्या. मैं खुश हूँ दसवीं का रिजल्ट आया है, पर उस ढाई साल के मासूम का क्या जिसे आग का मतलब भी पता नहीं था.'अब ये मेरे बस में नहीं है छतरपुर ले जाना पड़ेगा'. Basic Treatment के बाद पापा ने सिटी रेफेर करने को बोल दिया. 'डॉक्टर साब पैसे नहीं हैं'. पापा ने चुपचाप 500 का नोट निकाल कर दे दिया. वो दुखिमन दुआ देता हुआ चला गया. 'अब ये नहीं बचेगा 80% जल चुका है.' पापा ने मेरी तरफ मुड़ते कहा. पापा की कोरें भीगी हुई हैं.
ये ख़ुशी भी अजीब होती है, खुश रहने कहाँ देती है!

March 2008...
इंजीनियरिंग मैं 'Sad Stories' नहीं होती, लेकिन Panjaabi sir को देखता हूँ तो  ये बात भी झूठ लगने लगती है. वो गर्व से बोलते हैं, वो 'Jyoti Talkies Circle' है  वो मेरे बेटे ने डिजाईन किया है...फिर 80 साल की बूढी आँखें छत ताकने लगती हैं. इस उम्र में Daily Basis पे  Lectures लेना उनका शौक है मजबूरी, उनकी कांपती हड्डियां बता ही देती हैं. आज बस इतना ही, वो Basic Civil की किताब उठा दरबाजे की तरफ बढ जाते हैं. मैं चुपचाप उन्हें जाते देखता हूँ. कहते हैं बहुत सी चीजें छुपाये नहीं छुपती.

May 2008...
कॉलेज  के एक Senior  के पापा  बीमार  हैं, उसके दोस्त  इलाज़  के लिय पैसे जोड़ रहे  हैं......लड़का हॉस्पिटल में है......उसके दोस्तों  के चेहरों  में  मुझे खुदा  नज़र  आता  है. एक Classmate  ने  100 रूपये  दिए  हैं.......ये 50 रूपये  वापस  लो, 50 रूपये से ज्यादा मत दो, तुम्हारे घर  से भी  तो  सीमित पैसे आते हैं.... बाहर सिगरेट  के टपरे पर  आज  कुछ  कम भीड़ देख  अच्छा लगता  है.


Oct 2008...
अबे पी ना, पी के देख, सोमरस है....मैं मुस्कुरा कर मना करता हूँ. ....अब  पेपर  उठा  लिया  हाथ  में  उसने, अबे ये लोग पी  कर गाड़ी  क्यूँ  चलाते  हैं, मरेंगे  ही साले, वो पेपर पढ़ के बोलता है...... उसे भी 10km दूर अपने रूम जाना  है, रात में ही...... अबे अभी तो 3 ही हुए हैं, 5 तक तो मुझे होश रहता है..... मैं मुस्कुराता हूँ.

Jan 2009...
मैं इस जगह नया नया रहने या हूँ..चाय के टपरे पर चाय पी रहा हूँ. 'भैया एक रूपये देदो ना.' चिथड़ों में एक 7-8 साल का लड़का पैसे मांग रहा है. 'अबे जा यहाँ से.' चायबाला चिल्लाता है. मैं एक रुपया दे देता हूँ. 'कितनों को पैसे दोगे भैया, यहाँ बहुत आते है.'....एक तरफ काले, बदसूरत लड़के मायूस से पैसे मांग रहे हैं....वहां HPCL के ग्रौंद पे गेंद खेली जा रही है. 'इनमें और उनमे सिर्फ एक गेंद का फ़र्क है.' यश दार्शनिक अंदाज़ में दुखी हो कहता है. मैं बस हाँ में जबाब देता हूँ.

Oct 2009...
फ़ोन बजा 'पचमढ़ी चलोगे आज रात?'...'किससे?'....'bike से जा रहे हैं, चलना हो तो चलो.'  मामी बैठी हुई हैं, 'विवेक, bike से मत जाना, मना कर दो.' मैं मना कर देता हूँ. सुबह फ़ोन बजा-'विवेक वो accident हो गया है, नर्मदा हॉस्पिटल पहुँचो.' मैं पहुँचता हूँ, सुबह 5.00 बजे निकले थे पचमढ़ी को, होशंगाबाद के पहले accident हो गया. यही एक गाड़ी थी जिसपे 2 लोग बैठे थे........अगर मैं गया होता तो इसी पे बैठता, सोचकर मैं सिहर उठता हूँ. ..........पहली बार किसी funeral में गया हूँ, एक्सिडेंट के बाद एक महीने ज़िन्दगी से लड़ते-लड़ते दोस्त नहीं रहा. बिहार से था...उसके पापा का चेहरा देखने की हिम्मत नहीं होती......लौट के आ बाथरूम में रो पड़ता हूँ. नहाते हुए आंसू भी धुल से जाते हैं..............एक महीने बाद सब नोर्मल है.

April 2010...
'मैं उसी से शादी करूंगी' वो मुस्कुरा के बोलती है......मैं Coaching के बाद Daily उसे स्टॉप तक छोड़ने जाता हूँ.  मेरे से 3 साल बड़ी है लेकिन मैंने आज तक उससे अच्छी लड़की नहीं देखी. उसे एक लड़के से प्यार, पंजाबी है लड़का, वो ब्रह्मिन....उसकी शादी तय हो रही है कहीं और, लड़का 1 Lakh per Month कमाता है, MNC में है. वो घर बालों को अपने प्यार के बारे में बता देती है. मैं उसे मुर्ख कहता हूँ.....लेकिन शायद वो अच्छी है, तो अच्छी है....उसके घर बालों ने अब उसका घर से निकलना बंद करवा दिया है. इश्क के पहरे क्यूँ हैं?

Aug 2010...
मेरे यहाँ जुलूस निकला है, मैं भगवान् की कांवर उठाये हुए हूँ. फ़ोन बजता है,फ़ोन पे Sumit है 'वो 'उसके' पिताजी नहीं रहे.' वो दुखी हो बोलता है. वो मेरे सबसे अच्छे दोस्त के बारे में बात कर रहा था.मैं निःशब्द हूँ. एक प्रश्न है, हम भगवान् क्यूँ पूजते हैं? अपनों की सलामती के लिए ही ना!
मैंने मंदिर जाना छोड़ दिया है.

Dec 2010...
कुछ नहीं. कुछ अधूरे पन्ने स्याह भी हैं.