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Thursday, February 11, 2016

लिखते लिखते

जब मैं कानून के पास जाता हूँ तो बकरी को कानून चर जाता है
जब वो कानून के पास जाते हैं तो कानून को बकरी चर जाती है.

वो कहते हैं, मुल्क़ में सब बराबर हैं, क्यूंकि दोनों वाक्यों में 'कानून' और 'बकरी' सामान रूप से उपस्थित हैं. आप भी आईएएस की प्रिपरेशन कीजिये जम्हूरियत के कोनों से लिखी किताबें डिप्लोमेट बना देंगी और आप चाशनी लगा के झूठ को ढाँपना सीख जायेंगे.

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तुम्हें किताबों में लिखता अगर तो
सबकी हो जाती तुम
डायरी में लिखा इसलिए,
और वो डायरी खो गई घर बदलते.

खो गई तुम!
किताब बनाना बेहतर था,
फिर तो खरीद पाते.

--

एक शेर था,
दूसरा शेर था,
बाकि जंगल  था
'न किसी पे ज़ुल्म, न किसी पे किसी का हक़' वाला.

कुछ दिन एक शेर जंगल पे राज करता
कुछ दिन अगला.
कुछ दिन एक शेर छुपे चुपके जानवर खाता
कुछ दिन अगला.

जंगल का मोटो था-
राजा प्रजा है,
प्रजा राजा है.
न कोई मरेगा, न कोई मारेगा.


लेकिन
न एक शेर दूसरे को जानवर खाने से रोकता
न दूसरा शेर पहले को जानवर खाने से रोकता.

इस तरह राज चलता रहा
जंगल में सौहार्द बना रहा.
प्रजा राजा की रही
राजा प्रजा का रहा.

मरे जानवर
कुछ खुद को दांत गढ़ा मर गए,
कुछ सांप्रदायिक दंगो में मर गए.
घोषित किये जाते रहे.
लोकतंत्र बचा रहा.

डेमोक्रेसी शेरों द्वारा
'मेनिपुलेटिंग पीपल फॉर  आउन बेनिफिट'
के अलावा क्या है?

Thursday, June 9, 2011

BakBak ~~This Week^

I  have so many things to share this week.......
Like-
Some Songs.... Zindagi na Milegi....... and Delhi Belly both have good music....

1.Dil Dhadakne Do..... (Zindagi na Milegi) is a nice song with refreshing lyrics (not much as Prasoon Joshi penned for 'Break ke Baad' but still lovely)

2.Sweety Tera Pyaaar (Delhi Belly) --- Aamir Khan is really creative so that his team, Abhinav Deo made a flop like 'Game' (bhool ke mat dekh lena) but now 'Delhi.....'s promos making somee hope.......and music, songs, lyrics all are just awesome.

3. Fallin (Aysel)--- A ultimate song from a ultimate singer.......a must listen song, click on-
Fallin-Aysel

4. Meri Zindagi--- The only hope of Pakistan's Female-Pop-Industry Faiza Mujahid sang this song.......sunoge.... to kai baar sunoge.......must listen.

                        .............and at last, log jab zajbati hote hai to Jagjeet Singh ko sunte hain. So last one is-

5. Khoob jamegi hum dono me--- (Albem- Inteha) by jagjeet singh.

Other than songs, i have a Blog  to share..... Preeti Shenoy's  'Just a Mother of Two' so read this blog too.

One Must Watch Film--- If u love Hollywood but watched so many, and not getting any new film then watch  'Surya s/o Krishnan'. This is a Telugu movie directed by famous Ganesh Menon, starred Surya, Sameera Reddy, Story basically on Son-Father relations, was a blockbuster. U will get it Here with English Subtitles.


 ...........and at last, my net-connection is not working properly, so not gonna share any....but i bought a new digicam from Sony, so share some b'ful pics next time.

                                                                                   Have a good day..........enjoy.


                                                                                                                             ~ V!Vs




Thursday, April 7, 2011

BakBak: Yeh Saali Zindagi

        Enrique चाचू के पाँचों एल्बम बार-बार सुनने के बाद अब नये सिंगर को खोजा जा रहा है,  और खोज ख़त्म हुई है Arash पर, इनके फारसी गाने समझ में न आये लेकिन ताश के पत्तों के बीच  सिर्फ म्यूजिक ही याद रहता है, इसलिए हमें ज्यादा फर्क नहीं पड़ता...... इसके साथ  'Always' सोंग गाने बाली Aysel की आवाज़ तो 'सुपर सेक्सी' है....दोस्त की बात सुन हम हँसते हैं.......2 महीने का कॉलेज, फिर पकाऊ ज़िन्दगी, कॉलेज के इस तरफ हम ज़िन्दगी को घुमाते हैं, और उस तरफ ज़िन्दगी हमें......'रंग दे बसंती' का हर डायलोग सच नज़र आता है.....

      'सॉरी, वो उस दिन के लिए तुम गुस्सा तो नहीं थे न?' वो बोलती है......दुनिया की जहां आधी आवादी को खाने को नहीं मिलता है, जहां 66% भारतीय बच्चे कुपोषित हैं, जहां सरकारें बजट का 70% तक खुद डकार जाती हैं, और बच्चे 'माँ की हड्डी से चिपक ठिठुर, जाढे की रात बिताते हैं', वहीं इन्हें इन फ़ालतू के Emotions की पड़ी है, कितने लकी हैं हम जिनका पेट भरा है, तो इश्क के बारे में सोच तो सकते हैं. अभी इतनी रात को फुटपाथ पर भूखे बैठे होते तो चाँद में भी रोटी नज़र आ रही होती, उसकी शक्ल नहीं.......मैं मेरे पापा को थैंक्स कहता हूँ की उन्होंने इतना कमाया की हमारा पेट भरा है और इतना Capable बनाया की अपना पेट भर सकता हूँ, जबकि देश की आधी आवादी मूलभूत रोटी, कपडा और मकान के लिए तरश रही है........और इसलिए भी की उन्होंने उस वहां हेल्थ फेसिलिटीज़ दी, जहां से एक ढंग का अस्पताल 50 किलोमीटर दूर है, और जाने के साधनों में सिर्फ ट्रेक्टर है.....बेचारा बीमार तो पहुँचते-पहुँचते ही मर जायेगा......
             ' तुम Administration (PSC) की तैयारी करो, तुम्हारा GK अच्छा है.'......मेरे अन्दर एक प्रश्न है, अफसर बनकर किसपर हुक्म चलाओगे? यहांके आधे लोग इतने भूखे की एक हज़ार रूपये के लिए कई जान ले ले और साहूकारों के सामने बहु-बेटियाँ तक चढाने को तैयार हैं, जब कुछ भी नहीं है बेवसी में आत्महत्या कर रहे हैं या इतने सताए की आप उनपर अपना शासन चला के भी कुछ नहीं उखाड़ पाओगे, हज़ारों बर्वरता से पुलिस द्वारा मारे जाते हैं, और आतंकी या नक्सली करार कर दिए जाते हैं, या कुछ इतने निष्ठुर की चंद पैसों से आगे उनके सोचने की क्षमता नहीं जाती......कभी-कभी लगता है, हम उस दल-दल के कीड़े है, जिन्हें रेंगना है, और वो भी उतना ही जितना की सरकार हुक्म दे.....हुक्मरानों की बिछाई बिसात पे मोहरे बदले जाते हैं और हम तो वो पैदल भी नहीं जिन्हें जंग में ही सही कम से कम इज्ज़त की मौत तो नसीब होती है......मैं कभी-कभी चीखना चाहता हूँ, कि मैं इस दल-दल का हिस्सा बनना नहीं चाहता.

                 सड़क पर कचरा बीनने बाले बच्चे 'Right to Education' पर गन्दा मज़ाक लगते हैं, उन्ही में से कोई सड़क पर हादसे का शिकार हो जाये.........और उसके शरीर को उठाने बाला भी कोई न हो तो........!!!.......... लावारिश सी ज़िन्दगी में वो लावारिश लाश ज़िन्दगी भर याद रहेगी. 

कुछ हाल भोपाल की सडको से--

                  




              ******

अन्ना हजारे, तुम्हारे प्रयास व्यर्थ न जाये.........तुम्हें प्रणाम!!

Thursday, March 3, 2011

'हर एक दिन चांदनी की तरह.......

             इश्क की बायलोजी हमें कभी समझ ना आई, प्यार उससे हुआ जो 10 में से 7 दिन गुस्सा रहती है. शायद जन्नत में इश्क जनने बाले को भी लगता होगा ये क्या बना दिया..... इश्क जब बदबू देने लगता है तो लगता है किसी हाई-वे पे लगे 6-7 घंटे के जाम में आप फंसे हैं और म्यूजिक सिस्टम तक 'टाइम पास' करने के लिए नहीं है, और साल्ला पीछे भी नहीं जा सकते, और 'यू-टर्न'  भी नहीं ले सकते........दिल का मामला है, फंसता है तो दर्द बहुत देता है.
                   भाई आया है, आते ही बोलता है, इतना गन्दा रूम, कैसे रहते होगे........बालकनी में पड़े कचरे के ढेर को देख उसे आश्चर्य होता है. सुबह उसे लगता है कितनी बोरिंग लाइफ है तुम्हारी.....और रात को जब 10 बजे से पत्ते शुरू हो जाते हैं, और ENRIQUE चाचू के गानों के बीच फड़ जमती है.......फिर रात 1.00 बजे की 'मैगी' नूडल्स,  तो उसे लगता है कितने एश कर रहा हूँ....लेकिन फ़ालतू अभी भी हूँ. 'विवेक भैया' तुम्हारे पास कुछ काम तो है नहीं. हम बेचारे भी बस मुस्कुरा के रह जाते हैं.  कैसे बताये MBBS बालों की तरह 11-11 घंटे पढ़े तो सटिया ना जाएँगे.
        ये कुछ नया सा है, जैसे RODIES 8.0  के ओडिसंस देखना सबको पसंद है, दूसरों को गालियाँ मिलती हैं, तालियाँ हमारे रूम में बजती हैं. मसलन चीजें अच्छी ना होकर 'सेक्सी' हो गयी हैं, जैसे हम 'होटल राजहंस' खाना खाने इसलिए नहीं जाते क्यूंकि वहां की सब्जियां हमारे रूममेट को 'सेक्सी' नहीं लगती और मेरे पास बाइक इसलिए नहीं है क्यूंकि मेरे भाई को 'सेक्सी बाइक' चाहिए और 1st इयर में ही उन्हें 'सेक्सी बाइक' देना पापा को मुनासिब नहीं है.
    कॉलेज की चारदीवारी से निकलने का वक़्त हो गया है, लेकिन चाहत किसी की नहीं है. चाहत हो स्कूल से निकलने की भी नहीं थी. विपिन बोलता है नवोदय ग्रेजुअशन तक होना चाहिए..........'और ग्रेजुअशन का टाइम कम से कम 5-6 साल, B. Tech जैसा 4 साल नहीं, अमित हाँ में हां मिलाते बोलता है.........' वैसे  5-6 साल का ग्रेजुअशन का कौन सा कोर्स होता है?' एक नया प्रश्न उठा है..........'MBBS का'.......'तो रहने दो, हम नही कर पाते, इतना पकना अपने बस में नहीं'......और सब हंस पड़ते हैं, भाई का चेहरा देखने लायक है.
           हम अपने दोस्त की इंटरव्यू की प्रेक्टिस करा रहे है.......' What's your name?' .......... 'What's my name, What's my name, माय  नेम इज़ शीला, शीला की जवानी'.........Interview की जगह पूरा रूम कॉमेडी सर्कस का मंच बन गया है.
              पता में 62 Kg का हो गया हूँ,......'तुम मज़ाक कर रहे हो, अभी पिछले साल तो तुम 53 के थे' उसको बिलीव ही नहीं होता है..... 'हाँ, और तुम 42 Kg की हो, ज्यादा मत इतराओ'...........'So What, I Have a Perfect Figure'.........मैं जोर-जोर से हंस देता हूँ. वो फ़ोन रख देती है.......'साल्ला जब से करीना ने Zero Figure बनाया है लडकियां इनविज़िबल-सी दिखने लगी हैं, दूर से देखो तो पता ही नहीं चलता की वहां कोई खड़ा है, 'हम आपके हैं कौन' की माधुरी भी इनके चक्कर में आंटी लगती है' बातें सुन रहा बगल में बैठा दोस्त बोलता है............हम बड़ी देर तक हँसते रहते हैं.
         कॉलेज में 'आरक्षण' फिल्म की शूटिंग का 'कैंटीन का सेट' अभी तक बना हुआ है, वहीँ खड़े होकर हम सैफ, दीपिका की तरह एक्टिंग कर रहे हैं, और बीच में हंसी के ठहाके...........मुझे लगता है जैसे गूंजती हंसी बस कुछ दिन की बची है, एक दिन की चांदनी की तरह.....3 महीने बाद हम कहाँ, तुम कहाँ!!
चार साल चार दिन की तरह गुजर गये, यहाँ तक की सचिन को भी 200 रन बनाए एक साल हो गया..और हमें आज भी लगता है जैसे ये कल की ही बात है. 

Wednesday, February 16, 2011

BakBak...2

वो कह रहे हैं 'इश्क की Biology तुम्हें समझ नहीं आएगी, तुम्हें हर दूसरी लड़की से प्यार हो जाता है. मूवी देखने के बाद हीरोइन से भी.' मैं मुसकुराता हूँ.
' मुझे जॉब मिल जाये, मैं Settle हो जाऊंगा, उससे शादी कर लूँगा. उसका बाप भी मानेगा. वैसे भी हर लड़की का बाप विल्लैन होता है.' मैं हाँ में सर हिलाता हूँ. मेरे Senior हैं.
आज फ़ोन बजता है, फ़ोन पर वही सीनिअर हैं. 'यार कैसा है?.... 'ठीक हूँ सर.' ....'कोई नई मिली की नहीं?'.....'नहीं, आपके क्या हाल हैं?  मै'म कैसी हैं?'....'यार हमारा ब्रेक-उप हो गया है. उसने वहीं TCS में ही अपने Colleage से शादी कर ली है. हम दोनों ही स्विच नहीं कर सकते था ना!'.............ये इश्क भी अजीब हो गया है. बिलकुल Fastrack के Ad की तरह. एक Break-up कि दूजी कहानी शुरू. मैं शुरू में B-tech में आकर Pendrive-Pendrive खेलता था. अब सिटी बस का ड्राईवर Pendrive से गाने चलाता है म्यूजिक सिस्टम में. 'क्या करें भैया एक GB की है, इसके पूरे गाने सुन लिए, दूकान बाला 50 रूपये लेता है भरने के, इसलिए नहीं डलवाए. यही बजाने पड़ रहे हैं.'.......'पता एक समय MACT (MANIT) बाले किराया नहीं देते थे बस का. ........मैं मुस्कुराता हूँ, आप Bike नहीं चलाते हैं क्या?....'नहीं'....'क्यूँ?'..'येसे ही.'......'सही है, पिछले साल 65 लड़के मर गये Bike से' मैं कुछ नहीं कहता हूँ. ज़िन्दगी कितनी फास्ट हो गयी है, Racing Bikes और ज़िन्दगी की Race एक सी लगती है. तुम Bike से Race करो और ज़िन्दगी की भी. देखते हैं Bike Race जीतते हो या जिंदगी की Race.
       'तुम्हें करना क्या है?..'पता नहीं'...'एक बार प्लेसमेंट हो जाये तो जो करना हो करना, कांफिडेंस बढ जायेगा.' उनकी मुस्कान का राज आज समझ आता है, अब कांफिडेंस है, लेकिन प्रश्न स्थर है- 'मुझे करना क्या है.?'


PSC कि तैयारी शुरू की है, कुछ प्रश्न आपसे भी-
--' Amazon नदी बड़ी है या Amazon.com Book selling site?'
--'देश का सबसे बड़ा बैंक कौन सा है? RBI या A. रजा (एक्स-टेलिकॉम मिनिस्टर) का घर?'
--'आप क्या पसंद करेंगे,  एक इंजिनियर बनना या सोनिया गाँधी के यहाँ खाना बनाना? इंजिनियर बनने से 40000-50000 महीने कमाएंगे, और सोनिया जी रसोई सम्हालने से राष्ट्रपति बन जायेंगे. (जैसा कि राजस्थान के एक मिनिस्टर ने टिपण्णी की थी.) फैसला आपका.'
--...और सबसे अहम सवाल, कमेंट्स में इसका Answer जरूर दें- ' हमने अंग्रेज शासन में ज्यादा तरक्की कि या स्वतंत्रता के 63 सालों में?'

Monday, January 31, 2011

BakBak

मैंने एक बात सीखी, the great Indian thinking, एक गवर्मेंट Teacher महीने भर स्कूल नहीं जाता है, और बुराई सिस्टम की करता है, की यहाँ शिक्षा का स्तर डाउन हो रहा है. मध्य प्रदेश में पहली बार किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं, और हमारे कृषि मंत्री ( जो खुद ही Agricultural Science से Ph. D हैं) का कमेन्ट आता है कि ''किसान अपने  किये की सजा भुगत रहे हैं. पहले विदेशी खाद का उपयोग किया और धरती बंजर कर दी.'' वाह भाई वाह! मान गये, साल्ला गलतियां खुद करो, गन्दी policies तुम बनाओ, ओला राहत का पैसा अपने रिश्तेदारों को तुम खिलाओ और जब बेचारे पेट के मारे लोग खुद को मारने लगे तो अपनी बेहूदा सी बकबक लेकर शुरू हो जाओ. इन राजनेतिक गधों के कुत्तेपन की कोई हद ही नहीं है. आज राजधानी में मेला लगा, 'अन्त्योदय मेला' सारे प्रदेश के लोग आये एक hope के साथ की कुछ benifit तो मिलेगा उन्हें, और पता है हमारे CM ने उन्हें क्या दिया??  ठेंगा......किसी को कुछ भी नहीं, इन पीड़ितों के लिए सरकार  के  पास कुछ भी नहीं है.निकम्मी सरकार के निकम्मे लोग अच्छाई का मुखोटा लगाये सरकार चला रहे हैं और लोग यहाँ ये सहने पर मजबूर हैं.

 केंद्र में एक साहब ने १.७६ लाख करोड़ का घोटाला किया हुआ है, साल्ले को पता भी नहीं होगा की कितने शून्य होते हैं इसमें. विदेश मंत्री की कुर्सी पे एक येसा बंदा बैठा है जो अपने घर के relations पड़ोसियों के साथ भी नहीं सम्हाल सकता, देश के क्या सम्हालेगा. लोगों का कहना है SC है तो रिवार्ड दिया है, विदेश मंत्रालय के रूप में, जैसे साल्ला विदेश मंत्रालय मंत्रालय ना होकर लड्डू-पेडा हो गया हो, किसी नौकर ने अच्छा काम किया तो दो पेड़े और दे दिए.......भैया देश की बात हो रही है, मजाक नहीं, पूरे  सौ करोड़ लोगों का सबाल है तो मंत्रालय येसे ही कैसे बाँट सकते हैं. नीता रादिया जैसे लोबिस्ट यहाँ भाग्य विधाता बन गये हैं और NDTV जैसे chennels मंत्री बना रहे हैं, जैसे सरदार जी (PM) की औकाद कुछ भी नहीं है, वो सिर्फ स्टंप ले के बैठे हैं, आओ मिलो तो तुमपर भी ठप्पा लगा देंगे. किसी देश के प्रमुख नेता को इतना बेचारा मैंने कभी नहीं देखा ना ही इतिहास में पढ़ा है.
 
तंग आ गया हूँ में इन सब से, इस कीचड से, इस गन्दी व्यवस्था से. पिछले महीने के विधानसभा सत्र के pass रखे रहे मेरे पास, लेकिन मैं नहीं देखने गया, साल्ला इन जुटे-चप्पल फेंकते असभ्यों को देखने का मन ही नहीं किया, और मैंने वही pass बगल बाले अंकल को दिया तो वो ऐसे चहके जैसे लाइफ टाइम  ऑफर मिल रहा हो.

इनके कुत्तेपन ने संन्यास लेने को मजबूर कर दिया है, atleast सोचने पर मजबूर तो कर ही दिया है.
 
मेरे पापा आये हुए हैं, मुझसे मिलने. अगली बार दुनिया भर पिताओं के ऊपर...........

Saturday, January 8, 2011

बकबक

     'मैं गाँव से हूँ, मुझे नहीं पता क्या सच है क्या नहीं. लेकिन विकास पंहुचा हो या नहीं , साम्प्रदायिकता ज़रूर वहां पहुच गई है.' मैं चिल्ला कर कहता हूँ.
       'चिल्ला क्यूँ रहे हो?'
       'तो तुम अपनी बक-बक कब बंद करोगी? caste, caste, caste, भाड़ में गई ये caste, ये religion, ये बकबास.'
       'तो मैं क्या करूं? मैंने बनायी थी क्या?' .....बस मैं अपने पापा के oppose मैं नहीं जाउंगी.'
       'हां मुझे पता है, और मैं भी यही समझा रहा था. हम आगे तक नहीं जायेंगे लेकिन उसके लिए caste reason नहीं होगी, permission होगी. तुम्हें पता है? तुम्हें अपने माँ-बाप से ज्यादा कोई प्यार नहीं कर सकता, कभी नहीं.' मैं शालीनता से कहता हूँ.
       'ये 'माँ-बाप' वाला dilogue कहाँ से मारा?' वो उसी अदा से कहती है.
       'मेरे TPO ने बोला था एक दिन.' वो सुन कर मुस्कुरा दी. 'लेकिन एक बात बताओ, मुझे हमेशा येसी ही लडकियां क्यों मिलती हैं?' मैंने धीरे देकर कहा.
      'तुम्हारी choice ही गन्दी है.''
      'क्यूँ मैंने तुम्हें choose नहीं किया था.'
      'हाँ मैंने किया था, अब खुश! तुम कितने proudy हो. उसको तो तुमने किया था. हाँ, पता, वो तुमसे ज्यादा proudy है......तभी ना तुम्हें पानी पिला गई. हाहाहा.....' खिलखिला दी. उसका हंसना हमेशा अच्छा लगता है.
     'वो मेरी गलती थी.'
     'हाँ मुझे पता है, मेरी गलतियों पर भी तुम्ही सॉरी बोलते हो. हमेशा तुम ही गलत होते हो. देश के किसान मरे तो दुःख तुम्हें होता है, घोटाले हों तो भी तुम्हें दुःख होता है. जैसे सारे काम तुमने ही किये हों? मुझे पता है, तुम गलत नहीं हो. इश्क कोई खता नहीं, और उसे जताना भी.' वो कुछ serious हो कर बोली.
अब मेरी बारी थी, 'ये लास्ट बाला dilogue तुमने कहाँ से मारा?'
    'वो पढ़ा था कहीं, सिर्फ तुम्ही नहीं पढते-लिखते, कुछ-कुछ मैं भी करती हूँ.'
    'हाँ एक और बात, तुम अच्छे हो, thats why i love you, और मेरी choice कभी गलत नहीं होती.....'हम्म्म्म....'now i am leaving, भैया आ गये होंगे घर पर. तुम्हें छोड़ दूं? गाड़ी कब चलाना सीखोगे. तुम्हें तो बस Aptitude ही आता है, बस और कुछ नहीं.... बैठो....'

'..........काश तुम गलत होती....मैं तो बस उसे सही होते देखना चाहता हूँ. काश तुम मुझे ही गलत ठहराती..........'

*Story and Feelings are Real but not mine.

Sunday, December 12, 2010

kUcHh मजेदार....

ज़िन्दगी अजीब चीज है, कभी ना ख़त्म होने बाला ड्रामा......'तुम मुझे ये कैसे भूल सकते हो......तुमने मुझे रात को 3.00 बजे क्यूँ नही उठाया?' हे भगवान् जब तुम्हें पढना है तो अलार्म लगा के सोओ ना......दोस्त और उसकी 'उस' के साथ कबाब में हड्डी बना मैं उनकी बेतुकी बातें सुन यही सोच रहा था. पर ये बेतुकी भी कितनी अजीब होती है.....जब हमारे साथ होती है तो अच्छी लगती है....और ओरो को करते देखते है तो 'बेतुकी'.
                         खैर, बिल आया '100' रूपये.........कुल तीन कॉफ़ी का बिल. 'इतना तो एक मजदूर कमा पाता है, दिन भर काम करने के बाद और यही 100 रूपये उसके घर के आठ आदमियों का पेट भरते हैं वो भी दोनों वक़्त की'........हमारी इस बेवक्त-की-बेतुकी का साथ दोस्त ने भी दिया, भरपूर. लेकिन मैडम गुस्सा....और हमारे आशिक मियाँ अब मनाने में जुट गये....बेचारे दोस्त की फ़िक्र नही.......ये आशिकी है यारा....खैर ये हमें भी अच्छा लगता था कभी, सताना किसी को, रुलाना किसी को, मनाना किसी को....लेकिन वो आशिकी ना थी, मियाँ हम अब तक ना समझ पाए वो क्या था.
 खैर पोपुलेशन बढ रही है, लगता है आत्माएं आज कल जहन्नुम से निकल सीधा आकर आदमी बनने लगी हैं. भगवान् ने पुराना ८४ लाख योनियों का सिस्टम चेंज कर दिया है. लेकिन यहाँ भी कित्ता सुख है.......'चेतक ब्रिज' के फुटपाथ पे लत्तो में पड़े आदमी को हमने देखा और 10 डिग्री की कडाके की ठण्ड में इग्नोर करते हुए हम आगे बढ गये......सी सी करते हुए.
 इंसानियत मर गई है और यही हम कह रहे है, ब्लॉग पे.......और अभी अभी छोड़ आये हैं लत्तो में लिपटा वो इंसान! यहाँ सब मेरे जैसे ही हैं...... घर में बैठ भ्रष्टाचार बढ़ने की गपशप करने बाले. ...भले ऑफिस में टेबल के नीचे पैसे सरकाए हों.
   "बचपन में सुना था 'बेटा पढ़ लो, काम आयेगा.' ये धोनी क्यूँ नही अपने माँ-बाप की सुनता था???? " अच्छा SMS था ना..अभी अभी मोबाइल बजा है. बेचारी मिडिल-क्लास कुछ सोचना ज़रूर शुरू कर दी होगी.
मियाँ मोबाइल भी अजीब है, एक अनपढ़ भी ओपरेट कर लेता है और हम बेचारे आधी B.Tech. सिग्नल्स, सिस्टम्स, और Mobile Communication पढने में गुजार दिए.
आज अखबार में पढ़ा है, भ्रष्टाचारी में देश 17 पायदान और बढ़ गया......हो भी क्यूँ नहीं एसा.....बेचारे हम भी अपने पूर्वजों को देख-देख अपनी सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे हैं.
अजीब ज़िन्दगी है, एक साहब मिले, उन्हें इस बार पिताजी ने पैसे नहीं भेजे थे......उनका इंजीनियरिंग का साढ़े पांचवा साल है और अभी 6 महिना और बचे हैं....साबजी हमारे सीनियर थे तो हम अदब से मिले...... वो रोना शुरू हो गये...'पापा ने पैसे नहीं भेजे हैं ये तो हमारा हक है कम से कम हक के पैसे तो भेजते'. ये अजीब देश है, अपने कर्त्तव्य से पहले यहाँ हक सिखाया जाता है....और ज़िन्दगी भर हम उसे गुनगुनाते रहते हैं. फिर बेचारे उसी हक को पाने घूस देते हैं, और घूसखोरी  को लेकर रोते हैं. तंत्र वेतंत्र है, कहने को अनंत है.......फिलहाल, आज की बकबक ख़त्म.