Showing posts with label Leftist Poems. Show all posts
Showing posts with label Leftist Poems. Show all posts

Thursday, December 8, 2016

मणिपुर की बेटी के लिए

Irom Sharmila and Siroi Lily

तुम्हारी आग को राख में नहीं बदल सके
आखिर अफ्सपा को विदाई देनी ही पड़ेगी.

तुम साहस और इच्छाशक्ति में 
नमक सत्याग्रह की याद दिला देती हो.

बदन में तुम्हारे नली रही,
अफ़सोस, दो चार मैडल टांगता कोई.

तुम उम्मीद का सफ़ेद सिरोई लिली हो
जिसपे मुल्क की सरकार को फक्र होगा,
जिसके ही ख़िलाफ़ तुम खड़ी थीं.

जैसे कि ब्रिटिश संसद में 
गाँधी-मूर्ति शौभायमान है.


*अफ्सपा - AFSPA Armed Forces (Special Powers) Act
*सिरोई लिली- मणिपुर का राज्यीय पुष्प (स्टेट फ्लावर)

Wednesday, September 18, 2013

'विद्रोही' कवितायेँ


[ उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में जन्मा प्रगतिशील चेतना का यह प्रखर कवि ‘विद्रोही’ नाम से विख्यात है. दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों के बीच उनकी कविताएँ ख़ासी लोकप्रिय रही हैं. वाम आंदोलन से जुड़ने की ख़्वाहिश और जेएनयू के अंदर के लोकतांत्रिक माहौल ने उन्हें इतना आकृष्ट किया कि वे इसी परिसर के होकर रह गए. उन्होंने इस परिसर में जीवन के 30 से भी अधिक वसंत गुज़ारे हैं. शरीर से कमज़ोर लेकिन मन से सचेत और मज़बूत इस कवि ने अपनी कविताओं को कभी कागज़ पर नहीं उतारा। उनकी कविताओं में कई तो अंधेरे में और राम की शक्ति पूजा की तरह की लंबी कविताएँ हैं. उन्हें अपनी सारी कविताएँ याद है और वे बराबर मौखिक रूप से अपनी कविताओं को छात्रों के बीच सुनाते रहे हैं. ख़ुद को नाज़िम हिकमत, पाब्लो नेरूदा, और कबीर की परंपरा से जोड़ने वाला यह कवि जेएनयू से बाहर की दुनिया के लिए अलक्षित सा रहा है. ]


हमारे खुरदरे पांवो की ठोकर से धसक सकती है ये तुम्हारी ज़मीन, 
हमारे थर्राए हुए हाथों की रगड़ से लहुलुहान हो सकता है ये तुम्हारा कोमल आसमान.
हम अपने खून चुते नाखूनों से चीर देंगे तुम्हारे मखमली गलीचों को ,
और हम जब एक दिन ज़मीन से आसमान तक खड़े कर फाड़ देंगे तुम्हारी मेहराबे,
तब उसमे से ना कोई कश्यप निकलेगा और ना कोई नरसिंह.


---**---


औरतें रोती जाती हैं, मरद मारते जाते हैं,
औरतें रोती हैं, मरद और मारते हैं.
औरतें ख़ूब ज़ोर से रोती हैं
मरद इतनी जोर से मारते हैं कि वे मर जाती हैं.
इतिहास में वह पहली औरत कौन थी जिसे सबसे पहले जलाया गया?
मैं नहीं जानता.
लेकिन जो भी रही हो मेरी माँ रही होगी,
मेरी चिंता यह है कि भविष्य में वह आखिरी स्त्री कौन होगी
जिसे सबसे अंत में जलाया जाएगा?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी होगी मेरी बेटी होगी
और यह मैं नहीं होने दूँगा.


---**---


मैं किसान हूँ,
आसमान में धान बो रहा हूँ.
कुछ लोग कह रहे हैं
कि पगले! आसमान में धान नहीं जमा करता.
मैं कहता हूँ पगले!
अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है
तो आसमान में धान भी जम सकता है.
और अब तो दोनों में से कोई एक होकर रहेगा,
या तो ज़मीन से भगवान उखड़ेगा
या आसमान में धान जमेगा.