Saturday, February 4, 2023

शौर्य गाथा : कान्हा

 


भाईसाहब की किताबें आई हैं और भाईसाहब बड़े खुश हैं. पापा कहते हैं "देखो... बुक्स..." भाईसाहब कहते हैं "बु... क्क.... "


पापा उन्हें कहते हैं बेटा गणेशजी वाली किताब लेकर आओ और भाईसाहब कृष्णा उठा लाते हैं. पापा कहते हैं "अरे ये तो कान्हा ले आए." भाईसाहब- "तान्हा... पापा तान्हा..."
पापा- "मेरा कान्हा कौन है?"
भाईसाहब मीठी सी मुस्कान लिए खुश होकर अपनी तरफ उंगली कर कहते हैं- "पापा मैं... मैं... तान्हा..."

#शौर्य_गाथा

Friday, February 3, 2023

शौर्य गाथा : मीठा से प्यार

 भाईसाहब इतना बोलने लगे हैं कि आप सुन सुनकर हंस हंस कर लोटपोट हो सकते हैं. इन्हें मीठा पसंद है और ज्यादा मीठा खाने की आदत देख घर में किसी ने इन्हें मीठा को मिर्ची बता दिया है. सोचा होगा, शायद वे मिर्ची का नाम सुन कम खायेंगे. लेकिन भाईसाहब तो भाईसाहब हैं, मिर्ची का टेस्ट भूल गए हैं और अब मीठा देखते ही बोलते हैं "मम्मा, मिच्ची खाना मिच्ची."😄

#शौर्य_गाथा

Sunday, January 22, 2023

शौर्य गाथा : #पेंटरबाबू


भाईसाहब पापा के साथ खेल रहे हैं फिर घर में घूम घूम पापा को खुशी खुशी बता रहे हैं "पापा ये बनाया..." पापा बेचारे रंगी दीवारों को देख रहे हैं. "और ये क्या बनाया शौर्य?" "पापा लाउंड एंड लाउंड (Round and Round)." भाईसाहब ने राउंड एंड राउंड एक Rhyme (Wheels on the...) से सीखा है. "अरे आपने तो बहुत सुंदर बनाया है. और कहां बनाया?" पापा एप्रिशिएट करते हैं. भाईसाहब अब पूरे घर की दीवारें दिखला रहे हैं "पापा यहां पापा यहां पापा ये... लाउंड एंड लाउन्ड बनाया पापा." "अच्छा!" पापा उन्हें गोद में लेकर लाड़ करते हैं. उनको सर्दी है लेकिन वे बहुत खुश होते हैं.

पापा बेचारे का काम बढ़ गया है. दीवारें पेंट करनी हैं, लेकिन पापा भी बहुत खुश हैं कि भाईसाहब स्केचिंग करके भी खुश होते हैं और उसे बता बताकर भी. :) :)

#शौर्य_गाथा



Wednesday, January 18, 2023

शौर्य गाथा : Love

 


भाईसाहब इतना बोलने लगे हैं कि आप सुन सुनकर हंस हंस कर लोटपोट हो सकते हैं. इन्हें मीठा पसंद है और ज्यादा मीठा खाने की आदत देख घर में किसी ने इन्हें मीठा को मिर्ची बता दिया है. सोचा होगा, शायद वे मिर्ची का नाम सुन कम खायेंगे. लेकिन भाईसाहब तो भाईसाहब हैं, मिर्ची का टेस्ट भूल गए हैं और अब मीठा देखते ही बोलते हैं "मम्मा, मिच्ची खाना मिच्ची."😄

#शौर्य_गाथा

Monday, January 16, 2023

शौर्य गाथा: Papa's Notes 2


 तुम पापा के घर में न होने पर पूछते ही रहते हो "पापा का गए? पापा का गए?" और पापा के आने पर दरवाजे पे ही खड़े मिलते हो और खुश हो जोर से चिल्लाते हो "पप्पा..." पापा तुरंत ही पकड़ कंधे पर ले लें तो जोर से Hug करते हो और फिर छोटे छोटे हाथों से गाल खिलाते किलकारते बोलते हो "पप्पा... पप्पा..." जैसे तुम्हारे पास सबकुछ हो. इतनी निश्चलता, इतना प्रेम, इतनी खुशी. पापा को तो जैसे दुनिया जहान को खुशियां मिल जाती हैं.

मम्मा कभी कभी कहती है कि "शौर्य न होता तो हम इतनी खुशी महसूस ही नहीं कर पाते." पापा मुस्कुराकर हां बोलते हैं. हम मम्मा-पापा समझने लगे हैं कि ज़िन्दगी में बच्चों का होना क्यों जरूरी है.

#शौर्य_गाथा #पापाकेनोट्स

Thursday, January 5, 2023

शौर्य गाथा : Pen

 


भाईसाहब के हाथ में एक पेन है जिसका ढक्कन (Cap) खोलने के लिए भाईसाहब पापा से कहते हैं 'पापा ये... पापा ये...' कह के उसके ढक्कन को खींच खींच इशारा कर रहे हैं. पापा जानते हैं कि एक बार ढक्कन खुल गया तो सोफा और दीवारों पर 'वर्ल्ड क्लास पेंटिंग' बन जाएंगी, इसलिए झूठ मूठ की पूरी मेहनत लगाते हैं और कहते हैं कि 'खुल नहीं रहा है. ' भाईसाहब मम्मा के पास जाते हैं मम्मा से कहते हैं मम्मा 'पापा थे थुल नहीं लहा... थुल नहीं लहा.' ये थोड़े बड़े वाक्य बोलना भाईसाहब ने अभी अभी सीखा है. मम्मा भी वही झूठमूठ का अभिनय करती हैं. भाईसाहब अब हाथ में पेन लिए मेहनत कर कर रहे हैं ... और थोड़ी देर में ढक्कन खोल लेते हैं. पापा के पास आते हैं खुश होकर बोलते हैं 'हा...हाहा... पापा थोल लिया... तोल लिया.' पापा मोबाइल से चेहरा हटा शाबाश बोल पाएं इसके पहले सोफे पर एक 'कंटेंपरेरी आर्ट' उभर आई है.

मम्मा पापा बेचारे सपाट चेहरा लिए एक दूसरे की शक्ल देख रहे हैं.

#शौर्य_गाथा

Wednesday, December 28, 2022

शौर्य गाथा : Pure Love


 भाईसाहब अपने मामा के यहां गए हैं और पापा को एक दिन में ही उनकी याद सताने लगी है. पापा उन्हें वीडियो कॉल करते हैं, वो खेल में मग्न हैं. उन्हें दोस्त मिल गए हैं, ममेरे भाई बहन के साथ ढेरों खेल खेल रहे हैं. वे अपने खिलौने दिखाते हैं, भाई बहन से मिलवाते हैं पापा ये... पापा ये... कह कर वीडियो कॉल पर बता रहे हैं. पापा उन्हें देखते हैं और फोन रख देते हैं.


पापा ने उनके पुराने वीडियो देखना शुरू कर दिए हैं और देखकर लग रहा है कि क्या सच ये बच्चा इतना छोटा भी था! शायद एक साल बाद आज के शौर्य के फोटो वीडियो देखकर यही लगे. बच्चे पंख लगाकर उड़ते हैं, तीव्रता से बड़े होते हैं... इतनी जल्दी की हम बस पलक झपकाते हैं और वो बढ़ जाते हैं.

मुझसे किसी ने कहा था कि जब आपकी संतान अपको प्यार करेगी तब आपको Pure Love के मायने पता चलेंगे. हालांकि उस उम्र में मैंने ये नहीं समझा था लेकिन अब पैरंटहुड के फेज में हूं तो वो बात अक्षरश सही लगती है। महज शौर्य 'पापा... पापा...' दिनभर चिल्लाते रहते हैं, पापा के बिना सोते नहीं हैं, जागते ही पापा चाहिए, पापा ऑफिस से आए नहीं को खुश होकर उनके पांव से लिपट 'पापा आ दए... आ दए...' कह कर खुश होना, दौड़ना.... सब, सब प्रेम के मायने सिखाने काफी है।

एक बार मैं निधि से पूछता हूं ' You know, what is love?' वो मुस्कुराकर गोद में बैठे शौर्य की ओर इशारा करती है ' ये... ये...' शौर्य भी अपनी तरफ उंगली कर खुश हो जोर जोर चिल्ला रहे हैं ' मम्मा ये... ये... '

#शौर्य_गाथा

Wednesday, December 21, 2022

शौर्य गाथा : Papa's Notes 1

 तुम्हारे हथेलियों में समा जाने वाले छोटे छोटे हाथ. ऑफिस से लौट आते ही पापा पापा कह चिपक जाना. हर एक चीज के लिए पापा को बुलाना. तुम ना होते तो जीवन में इतना खुश न होता. ये Phase जिंदगी का कभी जी ही नहीं पाता. तुमने यूं आकर जीवन को खूबसूरत बना दिया है कि सोच ही नहीं पाता हूं कि पहले जब तुम नहीं थे तो उस वक्त हम जी कैसे रहे थे! 


तुम्हारे रोने में अंदर से खुद रोने लगता हूं, तुम्हारे हंसने में सबकुछ हंसता सा लगता है. 


तुम्हारी जितनी उम्र के जितना ही बड़ा पिता हूं मैं. तुमने मुझे सिखाया है समझदार होना, थोड़ा सा ज्यादा Kind होना, थोड़े अपनी खुद की केयर अधिक करने लगा हूं, थोड़ा ज्यादा सा जीने लगा हूं.


Child is Father of Man (William Wordsworth) के मायने धीमे धीमे समझ आने लगे हैं। थोड़ा थोड़ा तुमसा होना चाहता हूं. तुम्हारे जितना ही मासूम... बिल्कुल 21 महीने के तुम्हारे जितना मासूम होना चाहता हूं.


#शौर्य_गाथा #पापाकेनोट्स Papa's Notes

Saturday, December 17, 2022

Avatar and Beyond...

 


अवतार पूरी ट्रिब्यूट लगी थी अमेरिका एशिया अफ्रीका के लिए, जब पहली बार 2009 में देखा था. उस वक्त कोलोनियल हिस्ट्री की इतनी समझ नहीं थी. लेकिन जो थी, जितना समझता था वह मेरे दृश्य पटल पर उग आ रहा था. 

 नॉर्थ अमेरिका... मरते नेटिव रेड इंडियंस, बढ़ती यूरोपियन कॉलोनीज, खनिज, अयस्कों का दोहन, वनों की सफाई... वाइल्डलाइफ का धीमा खात्मा...

अफ्रीका... गोल्ड कोस्ट (Gold Coast), आइवरी कोस्ट (Ivory Coast) , स्लेव कोस्ट (Slave Coast), ग्रेन कोस्ट (Grain Coast)... साउथ अफ्रीका... 20% गोरों के पास 80% भूमि... 80% संसाधन (Resources)...

इंडिया...लूट खसोट, मार-काट... 1857 विद्रोह... बहादुर शाह जफर के बेटों के थाली में परोसे गए सिर... निर्माण हत्याएं... तीर कमान लिए लड़ते, ब्रिटिश गोलियों से भूने जाते हजारों संथाल... मात्र 17 साल के लड़के खुदीराम बोस का फांसी पर झूलता मृत शरीर... और जाने क्या-क्या...

अवतार में पंडोरा ग्रह वासियों का जो प्रकृति से कनेक्शन था वह मुझे अफ्रीका के ट्राइब्स का... भारतीय संस्कृति का, नेटिव इंडियंस का प्रकृति के अत्यधिक करीब होना याद दिला रहा था...

अवतार एक बहुत बड़े कैनवास पर बनाई गई कोई पेंटिंग सी है. जो नीले रंग में कोलोनियल हिस्ट्री में झेली यातनाओं के सुर्ख लाल रंग को बखूबी प्रदर्शित करती है.

अवतार-2 (Avatar: The Way of Water) उस कैनवास का एक्सपेंशन बस लगती है. इसलिए जब मेरे साथ फिल्म देखने गई मेरी सासू मां कहती हैं कि 'मुझे ज्यादा समझ नहीं आ रही है' तो मैं बस कहता हूं कि :जो नीली आकृतियां हैं उन्हें भारतीय मान लीजिए और जो इंसानी आकृतियां हैं उन्हें ब्रिटिश राज... अपको समझ आने लगेगा.'

 मैं कटनी में हूं. फिल्म देख कर बाहर निकलते लॉर्ड स्लीमन आंखों के सामने दिखने लगता है. लाशें... पेड़ के दोनों ओर लटकी ठगी बंजारे पिंडारियों की कई सौ लाशें... कटनी का मुड़वारा स्टेशन आंखों के सामने घूमने लगता है... 1857 के विद्रोहियों के इतने नरमुंड पेड़ों पर लटके पड़े हैं कि इस जगह का नाम ही मुड़वारा पड़ गया है! विजयराघौगढ़ किले में धंसी गोलियां... लाशों से बना टीला... राजा सरजू प्रसाद सिंह का मृत शरीर... सब आंखों के सामने घूम गया है.

अवतार, अवतार-2 बस ग्राफिक्स, विजुअल्स के लिए ही नहीं देखी जानी चाहिए. ये फिल्में डॉक्यूमेंटेशन है मनुष्यता के साथ किए गए अपराध का, मानव के लालच का, दासप्रथा का, जुल्मों का और उससे अधिक उठ खड़े होने वाले उन चंद लोगों का जो जुर्म के खिलाफ खड़े हुए लड़े भिड़े और अनजान मौत ही मर गए.

Friday, December 16, 2022

शौर्य गाथा : Replies


 भाईसाहब ने पहला प्रयुत्तर (Reply) दिवाली के समय अक्टूबर में दिया था. जब इनसे पूछा गया कि खाना कैसा लग रहा है, भाईसाहब ने अप्रत्याशित रूप से कहा 'अच्छा'. हम सब दादा-दादी, पापा-मम्मा, चाचा-चाची, छोटू चाचू बहुत हंसे. अब भाईसाहब दो महीने बाद कुल इक्कीस महीने के हो गए हैं और हाथों में नहीं आते हैं. बोलना तो इतना लगे हैं कि हर प्रश्न का जवाब इनके पास होता है. मसलन पूछो 'क्या खाओगे?' जवाब आएगा 'दूद बिस्सिट' (दूध बिस्किट). 'क्या ये गेम खेलेंगे?' 'नहीं.. पापा नहीं...' और जाने क्या क्या... 

एक बार तो हद हो गई. भाईसाहब पापा मम्मा के साथ मार्केट गए थे. लौट कर आए और मम्मा से बोले 'की..स.., की..स..' (Keys) मतलब इन्हें घर की चाबियां चाहिए. मम्मा ने चाबी दे दी है, अब भाईसाहब दरवाज़े पर जाते हैं, Keyhole इनकी रीच में है ये कोशिश कर रहे हैं खोलने की. पापा मम्मा बेचारे बैग्स हाथ में लिए ठंड में बाहर खड़े हैं. पापा थोड़ा इरिटेट होकर बोलते हैं 'अरे यार शौर्य ऐसा नहीं करो.' लंबा वाक्य था, हम सोच रहे थे कि प्रत्युत्तर में भाईसाहब वही का वही वाक्य दोहरा देंगे लेकिन भाईसाहब का जवाब होता है 'आले याल पापा.. ए..छा.. नई कलो' हम लोगों का हंस-हंस कर बुरा हाल है और भाईसाहब वही दरवाजा खोलने में तल्लीन हैं.

#शौर्य_गाथा