Tuesday, November 22, 2022

शौर्य गाथा : भाई


 

भाईसाहब जब अपने भाई से अगस्त में मिले थे तो भाई पर अत्यधिक प्यार बरसाया था. इतना कि मम्मा से बार बार बोल रहे थे कि भाई को भी गोदी ले लो. लेकिन भाई तो छोटे हैं, भले ही तीन महीने सही. तो भाई ने एक बार जोर से एक टॉय कार हाथ से घुमाई और भाईसाहब की नाक के ऊपर हल्का कट लग गया. लेकिन मजाल की भाईसाहब ने गुस्सा किया हो. वो उतना ही प्यार बरसाते रहे.

भाईसाहब में अभी से बड़प्पन आ गया है. उनसे बड़े पर भले ही गुस्से में वो हाथ उठा दें लेकिन छोटो को उनकी गलती पर भी माफ कर देते हैं. 😃
भाईसाहब अब फिर से दीपावली पर भाई से मिलेंगे. मम्मा पापा की प्लानिंग ये है कि फिर से भाईसाहब या भाई चोटिल न हो जाएं, इसलिए दोनों बच्चों का ख्याल रखा जाएगा. लेकिन दोनों के भ्रातृ-स्नेह का असली पता तो अब दीपावली पर ही चलेगा.
फ़ोटो:- दादू की गोद में भाईसाहब और भाई.

Monday, November 21, 2022

शौर्य गाथा : Care & Hugs



 भाईसाहब की गुड मॉर्निंग हो गई है. मम्मा ने ढेर सारे Kisses भी दे दिए हैं. अब भाईसाहब को बालकनी से चिड़िया देखनी है इसलिए बोलते है 'चिईया' (चिड़िया). पापा उन्हें बालकनी तक लेकर जाते हैं. भाईसाहब को दो-तीन तोते दिखते हैं, दो-तीन कबूतर दिखते हैं. 'ये... ये...' करके भाईसाहब उनके बारे में पूछते हैं. अब भाईसाहब बोर हो गए हैं इसलिए बोलते हैं 'तओ' (चलो). उनको दूसरी बालकनी में ले जाया जाता है, वहां भी वे चिड़िया देखते हैं. एक कबूतर खिड़की में बैठी हुई है, शायद अंडे सै रही है. भाईसाहब पूछते हैं ये... पापा ज्ञान बघारते हैं कि इसे रॉक पिजन बोलते हैं, जिसका साइंटिफ नेम Columba livia है. भाईसाहब ज्यादा नहीं समझते हैं सीधा फिर से पूछते हैं 'ये...'

अब पापा बताते हैं कि जैसे आपकी मम्मा केयर करती है वैसे ही वो भी अपने बच्चो को केयर कर रही है. सुनकर भाईसाहब किचन की तरफ दौड़ जाते हैं और मम्मा को Hug कर लेते हैं. 😃👪

Sunday, November 20, 2022

शौर्य गाथा : Possessiveness



भाईसाहब की मम्मा की दोस्त आई हैं. साथ में 9 महीने की बहुत प्यारी सावी भी है. सावी बहुत क्यूट है, मम्मा उसे तुरंत प्यार करती हैं, पापा उसे गोदी में उठा लेते हैं. ये सब भाईसाहब देख रहे हैं. भाईसाहब पजेसिव हो जाते हैं, तुरंत गुस्से का इजहार करते हैं. मम्मा-पापा मुस्कुरा देते हैं.

इनकी आया के पास ये पापा-मम्मा को मौजूदगी में कम ही जाते हैं लेकिन जैसे ही सावी को उन्होंने लिया और ये भी दूसरे कंधे पे टंग गए हैं. सबकी हंसी छूट जाती है.

भाईसाहब ने सावी के साथ खेलना शुरूर कर दिया है. फ्रेंडशिप कर ली है. कुछ देर में सावी अपने मम्मा-पापा साथ वापस जा रही है और ये दुःखी हो रहे हैं. इतने में पापा ने सावी को गोद में ले लिया है, अब भाईसाहब फ्रेंड के जाने से दुःखी होना छोड़ पापा की गोद के लिए मचलने लगे हैं, इतना कि पापा को सावी को छोड़ इन्हें गोद लेना पड़ा है, तबतक इन्होंने दो चार आंसू तक बहा दिए हैं.

भाईसाहब आजकल पापा-मम्मा को लेकर बड़े पजेसिव हैं. उसूल है दोस्ती पक्की पर पापा-मम्मा अपने-अपने. 😀☺️

#शौर्य_गाथा

Friday, November 18, 2022

शौर्य गाथा : बाइक


 

भाईसाहब का पर्सनल गैराज है. इसमें इतनी गाडियां हैं जितनी पापा मम्मा के पास मिला कर भी नहीं हैं. एक घोड़ा भी है जिसपर भाईसाहब कभी कभी हॉर्स राइडिंग पर निकलते हैं, एक हाथी भी है जो मॉल में जोर- जोर से 'हाती ददा...', 'हाती दादा...' चिल्ला-चिल्लाकर रोकर खरीदा गया है. यह दौड़ता नहीं है, लेकिन भाईसाहब इसे रेंगा जरूर लेते हैं. बाकि की गाडियां, ट्राइसिकिल, बाइसिकिल इत्यादि के अलावा अब डिमांड एक बाइक की है. चाचू ने 'बडूम... बुडूम...' की आवाज निकाल गाड़ी-गाड़ी कहना सिखा भी दिया है. भाईसाहब एक बार टेस्ट ड्राइव भी ले चुके हैं. अब बस एक बार और मॉल जाने की दरकार है और फिर वही रो-रोकर चिल्लाकर ब्लैकमेलिंग शुरू हो जाएगी और इनके गैराज में बाइक का भी इज़ाफ़ा हो जाएगा.

#शौर्य_गाथा

शौर्य गाथा : लिखना


 

पापा कुछ लिख रहे हैं इसलिए भाईसाहब पास आ गए हैं. अब उन्हें भी लिखना है. उन्हें कॉपी पेन दे दिया गया है, अब पापा लिखना छोड़ उन्हें देख रहे हैं. पापा ने उनका हाथ पकड़ा और अपना नाम लिख दिया और कहा कि 'अब आप लिखिए.' भाईसाहब ने अपनी भाषा में कुछ लिखा है, जो पापा का नाम तो बिलकुल नहीं है. जिसे पढ़ने शायद भगवान को धरती पे उतरना पड़ेगा.


खैर, अब उन्हें दूसरा पन्ना चाहिए. पहले वाले पे पूरा लिख चुके हैं, या यूं कहें कि लिखकर ऊब चुके हैं. खुद से कॉपी को पलटा जाता हैं. पापा मना करते हैं, भाईसाहब गुस्से का इज़हार करते हैं. पापा उन्हें समझाते हैं कि पेपर पेड़ से बनते हैं और पापा पेड़ बचाते हैं इसलिए पेज खराब मत कीजिए. लेकिन भाईसाहब गुस्से में 'मम्मा... मम्मा...' चिल्लाकर 'बैकअप फोर्स' मंगाने लगे हैं. थककर पापा ने पन्ना उलट के दूसरा पन्ना भी सुपुर्द-ए-भाईसाहब कर दिया है.

अब भाईसाहब दूसरा पन्ने पे भी अपनी भाषा में कुछ लिखकर बहुत खुश हैं. हंस रहे हैं.

पापा इसलिए खुश हैं कि बैकअप फोर्स आने के पहले ही उन्होंने स्थिति सम्हाल ली है और आज दीवारें भी उच्च स्तर की पेंटिंग का कैनवास बनने से बच गईं हैं.

#शौर्य_गाथा

Thursday, November 17, 2022

शौर्य गाथा : रात साढ़े ग्यारह बजे

 


भाईसाहब 8 बजे सो जाते हैं और फिर रात साढ़े ग्यारह बजे जागकर 'पापा... दूध', 'पापा... मम्मा... दूध' चिल्लाने लगते हैं. मम्मा ऑफिस से थककर आई हैं, इसलिए घोड़े बेच के सो रही हैं. बेचारे पापा जाग जाते हैं, किचन जाते हैं. भाईसाहब पीछे पीछे हो लिए हैं. किचन में जो भी बर्तन रीच में है उसे उठा घूम रहे हैं. दो बर्तन मिल गए हैं तो बस रात में इनका म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट तैयार है, तरह तरह की धुन बजाई जा रही हैं. पापा ने दूध गर्म कर लिया है, तब तक इनका बर्तनों को बजा बजा, नई धुन निकाल निकालकर घर का चौथा चक्कर भी लग गया है. अब आप उनके पीछे- पीछे दौड़ के दूध पिला रहे हैं, साथ में 'ठन... ठन...' का म्यूजिक भी बज ही रहा है. आप उन्हें पकड़ते हैं, बर्तन छीनते हैं और जबरदस्ती दूध पिलाना शुरू करते हैं. 2- 3 घूंट पीते पीते भाईसाहब रोना शुरू कर देते हैं, जैसे किसी ने इन्हें जोर से पीटा हो. बस इतने शोर में मम्मा जाग जाती है. "क्या यार विवेक मैं ऑफिस से थककर आई हूं, थोड़ा सा तो ख्याल रख लो. कहां चोट आई है बेटा?"


पापा मन ही मन सोचते हैं कि 'क्या वो थककर नहीं आए हैं?' खैर! भाईसाहब का रोना बंद हो गया है, मम्मा की आवाज सुनते ही. अब वो पापा को तरफ देख देख मुस्कुरा रहे हैं, जैसे उनने पापा को डांट पिलाकर के अपना गोल अचीव कर लिया हो.

#शौर्य_गाथा

शौर्य गाथा : हाती दादा



 भाईसाहब ने 'हाथी दादा कहां चले...' rhyme को यूट्यूब से सुन सुन कर हाथी दादा कहना सीख लिया है. अब जब भी हाथी दादा की फोटो सामने आती, वीडियो आता है या खुद ही हाथी दादा सामने आ जाएं तो ये 'हाती दादा....', 'हती दादा...' चिल्लाने लगते हैं.

साहब हाथी दादा को देख उनके पास जाने की जिद कर रहे हैं... तकरीबन एक घंटे से. जब पास ले जाया गया तो डर कर मम्मा... मम्मा... कह मम्मी से चिपक गए.

उनका हाथी दादा के प्रति प्यार और हाथी दादा के पास जाने पर डर दोनों ही देखने लायक हैं.
#शौर्य_गाथा

शौर्य गाथा : अलग एहसास


 

भाईसाहब की मम्मा और दादी बाहर गए हुए हैं. भाईसाहब को सुला दिया गया है. पापा के जिम्मेदारी उनका ध्यान रखने की है. पापा हॉल में जाकर अपनी फेवरेट 'आग का दरिया' उठा लेते हैं.

एक घंटे बाद भाईसाहब की आवाज आती है.वो जाग गए हैं. पापा उन्हें लेकर किचन जाते हैं, दूध गर्म करते हैं. भाईसाहब दूध पीने से इंकार कर देते हैं. 'मम... मम...' बोलकर पानी की ओर इशारा करते हैं. पापा पानी पिलाते हैं.

अब फिर से भाईसाहब को सुलाना बड़ा टास्क है. पापा उन्हें लिटाते हैं, समझाते हैं कि 'वो अब बड़े हो गए हैं, खुद से सो सकते हैं.'

भाईसाहब पापा से चिपक के लेट जाते हैं, फिर पेट पर चढ़कर सोते हैं, फिर उतर के चिपक के लेटे हैं. पापा थोड़ा भी इधर उधर हिलते हैं तो वो पापा को और कस के पकड़ कर चिपक जाते हैं. मम्मा के साथ ये रोज ऐसे ही सोते हैं लेकिन पापा के साथ पहली बार है. पापा को अंदर से बहुत खुशी महसूस हो रही है, अलग सा एहसास जो शब्दों में यहां बयां नहीं किया जा सकता.

पापा भी 'आग का दरिया' दरिये में डाल उनसे चिपक सो जाते हैं.

रात बारह बजे पापा की आधी सी आंखे खुलती हैं. सामने दादी और मम्मा खड़े बोल रहे हैं "घर के सारे दरवाजे खुले हुए हैं... किचन में दूध खुला पड़ा है... बिलकुल ध्यान नहीं रखते... ब्लाह... ब्लाह..."

पापा उनको देखते हैं, मुस्कुराते हैं, चिपक के सोये भाईसाहब को चूमते हैं और फिर पूरी आंखे बंद कर सो जाते हैं.

पापा नींद में भी उसी अद्भुत एहसास में हैं. 🙂

#शौर्य_गाथा

*आग का दरिया : कुर्रतुलऐन हैदर रचित प्रसिद्ध उपन्यास

Wednesday, November 16, 2022

शौर्य गाथा : 'प्याये पापा'

 



भाईसाहब अभी कोई 2-3 दिन पहले ही कुल जमा डेढ़ साल के हुए हैं. इनकी मम्मा ने इन्हें 'प्यारे प्यारे पापा' कहना सिखा दिया है. अब आप ऑफिस से आते हैं तो अपनी भाषा में 'प्याये पापा' कह कर चिपक जाते हैं. झूठ झूठ गुस्सा करो तो 'प्याये प्याये पापा' कहकर पापा का गाल खिला-खिलाकर मनाने लगते हैं.

शौर्य गाथा : 'His First Painting'


जब आप ऑफिस से घर आते हैं तो पता चलता है कि आपके बेटे में हिडन टैलेंट भी है, वे आगे चलकर बहुत बड़े पेंटर साबित होने वाले हैं. उन्होंने अपना हुनर दिखाते हुए अपना पहला स्केच भी बनाया है, जो किसी कलाप्रेमी की नज़र में मॉडर्न आर्ट का एक बेहतरीन नमूना हो सकता है.
जब आप उनसे पूछते हैं कि आपने दीवार को गंदा क्यों किया? तो उनके एक्सप्रेशंस होते हैं: 'What! Where?'