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Sunday, February 3, 2013

Nadiya Anjuman and her 'Light Blue Memories'


                   

             एक 25 बरस की लड़की जो तालिबानी शासन में भी हाई स्कूल तक पढ़ी और छुप छुप के साहित्य भी. जिसने लिखना चाहा और क्या खूब लिखा कि पहचानी गयी सारी दुनिया में. सिर्फ एक संग्रह जिसमें कुछ गज़लें थी और कुछ ताज़ा नज्में उसे शोहरत दे गया....और शायद साथ में ले के आया मौत भी......क्यूंकि उसने लिखने कि गुश्ताखी की थी, इसलिए पीट पीटकर मार दी गई. अफगानिस्तान में जन्मी 'नादिया अंजुमन' की शायद सबसे बड़ी गलती अफगानिस्तान में जन्म और तालीबान के साये में पलना था. तमाम मुश्किलों के बाद भी पढने बाली, और सार्थक नज्में लिखने बाली इस लड़की को उसके पति के परिवार बालों ने 2005 में पीट पीटकर मार दिया क्यूंकि उसने शायरी करने गुस्ताखी की थी.

अफगानिस्तान के दमनकारी समाज में जिस तरह की कविता लिखने का दुस्साहस अंजुमन ने किया उसके लिए इस्पाती हौसलों और यक़ीन की बुनियाद ज़रूरी थी. अफगानी स्त्रियों की सामाजिक परिस्थितियों को दुनिया के सम्मुख लाने वाली एक ख्यात पत्रकार क्रिस्टीना लैम्ब ने अपनी एक किताब में अंजुमन का ज़िक्र करते हुए लिखा है - "दोस्त बताते हैं की उसका (अंजुमन का) परिवार बेहद गुस्से में था की एक प्रेम और सौन्दर्य के बारे में लिखी एक औरत की कवितायेँ खौफ़नाक पशेमानी की वजह बनने जा रही थीं."

उनकी एक नज़्म का अंश--

"अगर मेरी किताब की आँखों में तुम पढ़ पाते हो सितारों को
 तो फ़क़त एक दास्तान है वो मेरे अनंत सपनों की ...  "


One Blog to Share-- 'Her Blue Print' 


'Light Blue Memories' is her very famous poem written after fall of Taliban. You can read its English translation  Here.