प्यार करना बहुत ही सहज है, जैसे कि ज़ुल्म को झेलते हुए ख़ुद को लड़ाई के लिए तैयार करना. -पाश
Thursday, July 13, 2023
Days of Innocence #p2
Wednesday, July 12, 2023
शौर्य गाथा : Bhaisahab's First Day of School 🏫🎒🥰
भाईसाहब सोमवार को स्कूल जायेंगे ये सुनकर वे शनिवार से ही "पापा स्कूल चलो... स्कूल चलो..." की रट लगाए हैं, अलग ही लेवल का एक्साइटमेंट है।
भाईसाहब का स्कूल का पहला दिन है. नानाजी विशेष रूप से आए हैं. वे इनको शिक्षा संस्कार दे रहे हैं, नानी टिफिन तैयार कर रही हैं. मम्मा ने बैग तैयार किया है. भाईसाहब मम्मा पापा की गोद में बैठकर स्कूल जाते हैं। क्लासरूम के अंदर जाते ही रोना शुरू कर देते हैं! सारा एक्साइटमेंट फुस्स्स...!
स्कूल टाइम खत्म होने को और भाईसाहब बहुत खेल रहे हैं, बहुत खुश है, अब इन्होंने वापस घर आने से इंकार कर दिया है!! इन्हें समझा बुझा कर घर लाया जा रहा है और भाईसाहब अब स्कूल छोड़ने के नाम पे रोने लगे हैं.
पापा को अपने बोर्डिंग स्कूल (Jawahar navodaya vidyalaya) के दिन याद आ जाते हैं, पापा छठवीं में जाकर वहां बहुत रोये थे... और बारहवीं वहां निकलते हुए भी!
भाईसाहब का पहला दिन भी ऐसा ही था, जाते हुए रोना, और आते हुए स्कूल छोड़ने के गम में रोना!!
#शौर्य_गाथा #Shaurya_Gatha
Tuesday, July 4, 2023
शौर्य गाथा : Days of Innocence #part1
भाईसाहब बहुत तेज भागते हैं। वो भागते भागते एक रूम से दूसरे रूम में जा रहे थे कि उनका पैर का अंगूठा फाटक में टकरा गया। ऐसा मुझे बहुत बार हुआ है, शायद आपको भी हुआ हो, पैर की सबसे छोटी उंगली जबतब किसी भी चीज में टकराकर घायल हो जाती है और जो दर्द होता है न मां कसम! असहनीय होता है।
भाईसाहब के छोटे से पांव का छोटा सा अंगूठा! भाईसाहब बिलखने लगे हैं। पापा उन्हें झट से उठा लेते हैं और सहलाते हैं, लेकिन वे रोये जा रहे हैं। रोते रोते बोलते हैं "पापा... डॉक्टर... डॉक्टर..."
पापा: " हां बेटा आप डॉक्टर बन जाना और फिर खुद से चोट ठीक कर लेना।"
भाईसाहब रोते हुए: "पापा आप डॉक्टर बन जाओ ना... आप बन जाओ."
पापा मम्मा को हंसी आ जाती है।
पापा: "बेटा, दादू हैं न, उनसे दवा पूछ लेते हैं।"
भाईसाहब: "नहीं, आप डॉक्टर बन जाओ।"
बेचारे पापा अब इस उम्र में नीट (NEET) की तैयारी करें! पापा आयोडेक्स लाते हैं, इनके नन्हे पांव पर कुछ देर तक मलते हैं... और भाईसाहब पापा की मेहनत देख कह देते हैं, "पापा तीक हो गया... तीक।"
पापा मुस्कुराते हैं और भाईसाहब साथ में मुस्कुरा देते हैं। बाप जैसे नन्हे बेटे की नज़र में डॉक्टर बन गया हो!!
#शौर्य_गाथा #Shaurya_Gatha
Saturday, July 1, 2023
जंगल की कहानियां : Rescue from a Well
Friday, June 30, 2023
शौर्य गाथा : 7 Days Without Mamma #Day7
भाईसाहब को सुबह से पता है कि वे मम्मा को लेने जायेंगे इसलिए सबेरे से ही बोलते हैं "मम्मा से बात करा दो न, मम्मा के पास चलो न..." पापा उन्हें समझाते हैं कि मम्मा अभी ऑफिस में है, थोड़ी देर में बात करेगी.
शाम में पापा भाईसाहब को लेकर निकले हैं, घर से निकलते ही यशी ने रोना शुरू कर दिया है कि शौर्य क्यों चला गया है. उसके दादू समझा रहे हैं. Actually, उन्हें भी वापस निकलना है.
भाईसाहब निकलते ही बोलते हैं "पापा, शशि दीदी तहाँ है?" पापा उनका ध्यान भटकाने उन्हें डंप ट्रक दिखाते हैं, रोड रोलर भी दिख जाता है. "पापा, वो देखो ट्रेक्टर" अब भाईसाहब को भी मजा आने लगा है.
भाईसाहब रोड से उतरे ट्रक को देखकर: "पापा डंप ट्रक टूट गया है, एम्बुलेंस को बुला दो न!"
पापा, फ़ोन हाथ में लेकर: "हेलो! एम्बुलेंस मैं शौर्य का पापा बोल रहा हूँ, एक ट्रक टूट गया है जल्दी आना."
भाईसाहब: "पापा ब्लू एम्बुलेंस को भी बुला दो."पापा फ़ोन पर: "हेलो! ब्लू एम्बुलेंस आप भी आना."
पापा भाईसाहब से : "बेटा, फायर इंजन को भी बुला दूँ?"
भाईसाहब: "नहीं पापा वो तो टूट गई थी न. वो नहीं आयेदि."
पापा: "अच्छा!"
भाईसाहब एम्बुलेंस देखकर: "पापा वो देखो रेड एम्बुलेंस जा रही है... ऊँ... ऊँ... अब ट्रक ठीक हो जायेगा."
पापा को इनकी प्यारी सी बोली में ढेर सारी बातें सुन बहुत ही प्यार आता है. पापा दो-चार पुच्ची कर लेते हैं.
भाईसाहब मम्मा कि ट्रेनिंग अकादमी पहुँच गए हैं. मम्मा को देखते ही तुरंत ही "मेरी मम्मा..." कह लिपट जाते हैं, ऐसे जैसे शाम को घर लौटी गाय से बछड़ा चिपकता है. जैसे पूरे हफ्ते भर का प्रेम समेट लेना चाहते हों. पूरे डेढ़ घंटे ऐसे ही चिपके रहते हैं.
मम्मा बोलती है "बेटा, ड्रेस चेंज कर लूँ?"
भाईसाहब गोदी में चढ़े, गले लगे लगे ही बोलते हैं, "नहीं... मम्मा नहीं..." और ये ममतामय मिलाप पूरे डेढ़ घंटे चलता है.
ऐसे चिपके हैं जैसे मम्मा और उनके बीच कोई नहीं आ सकता हो. पापा सामने खड़े हैं लेकिन पापा को जैसे भूल से गए हैं, भाईसाहब भी, मम्मा भी. पापा भी तो एक हफ्ते दूर थे, एक हग (Hug) तो उनका भी बनता है ना! लेकिन भाईसाहब कहते हैं "पापा... नहीं... नहीं... मम्मा... मेरी मम्मा है... मेरी मम्मा." पापा हंसी छूट जाती है.
मम्मा की दोस्त कहती हैं " सर, मैम दुखी हो रही थीं कि शौर्य ने उनके बिना रह कैसे लिया!"
इसके लिए पापा मन ही मन नाना नानी को शुक्रिया कहते हैं. पापा को इस बात पे आश्चर्य है कि मम्मा ने कैसे रह लिया!
उधर मम्मा कि आँखें भर आई हैं. वहां और भी मायें अपने बच्चों को छोड़कर आई थीं और किसी के लिए भी ये आसान नहीं था.
भाईसाहब अब शॉपिंग करने निकले हैं, अपना फेवरेट एक्सकैवेटर खरीदते हैं और कहीं मम्मा थोड़ी सी भी अलग हुई कि बोलने लगते हैं "मम्मा... नहीं.. नहीं... जाना नहीं..."
पूरे टाइम मम्मा से चिपके हुए घर लौटे हैं और मम्मा से ही चिपक कर सो गए हैं.
#शौर्य_गाथा #Shaurya_Gatha
Thursday, June 29, 2023
शौर्य गाथा : 7 Days Without Mamma #Day6
पिछले पांच दिनों से हम भाईसाहब की मम्मा से कम से कम बात करा रहे थे, क्यूंकि बात करते ही ये रोना शुरू कर देते थे. लेकिन अगले दिन ही भाईसाहब मम्मा से मिल लेंगे इसलिए आज वीडियोकॉल पर इनकी बात मम्मा से करवाई जाती है.
मम्मा पूछती है: "बेटा याद आती है?" भाईसाहब सर मटकाकर 'हाँ' में जवाब दे देते हैं.
"बेटा मैं नहीं हूँ... मैं कल आ जाउंगी." मम्मा कहती है.
भाईसाहब: "आप नहीं हो इसलिए शशि दीदी आ दई है, ईसान भैया आ दया है."
नन्ही सी जान और इतनी समझ!! मम्मा नहीं हैं, इसलिए भैया दीदी आ गए हैं, इन्हें ये पता है! पापा का इन्हें बहुत जोर से प्यार करने का मन होता है. पापा इन्हें उठाकर कर जोर से भींच लेते हैं. मम्मा अपनी कोरों के आंसू पोंछते हुए फ़ोन से "बाय... बाय" बोल रही है. पापा की आँखें भी भींग गई हैं.
परिस्तिथियाँ सबको अधिक समझदार बना देती हैं.... यहाँ तक की दो साल की नन्ही सी जान को भी!
#शौर्य_गाथा #Shaurya_Gatha
Wednesday, June 28, 2023
शौर्य गाथा : 7 Days Without Mamma #Day5
भाईसाहब बहुत सारा बोलते हैं, बहुत मीठा बोलते हैं. तोतली सी आवाज़ साफ़ होने लगी है, और भी प्यारी हो गई है. बहुत सी ख्वाहिशें हैं, बहुत सी डिमांड्स हैं. बहुत से लफ्ज़ गले में ही अटक जाते हैं, बहुत सी शिकायतें ज़ुबां पर आ जाती हैं तो सबकी हंसी छूट जाती है. मसलन पापा की शिकायत मम्मा से 'मम्मा पापा को डांट दो न.' मम्मा की शिकायत पापा से 'मम्मा टीवी नहीं चला रही, पापा मम्मा को डांट दो न.' करते रहे हैं.
हद तो अब हुई जब मम्मा पास नहीं हैं और ये पापा पर गुस्सा हो गए हैं. पापा की गोदी में चढ़कर पापा से कहते हैं- 'पापा, पापा को डांट दो न.' ...और पापा खुद को डांटने लगते हैं.- 'पापा, ऐसा नहीं करते.'
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शाम में किसी बात पर यशी को उसके दादू (भाईसाहब के नानाजी) ने डांट दिया है. वो अनमनी होकर एक जगह बैठ गई है.
भाईसाहब देखते हैं, दौड़ के नानाजी के पास जाते हैं, हाथ मटकाकर कहते हैं- 'नाना ऐसा नहीं करते... नहीं करते.' और लौटकर दौड़ते हुए यशी के पास आते हैं, कहते हैं- 'शशि दीदी, मैंने नाना को डांट दिया... मत रो.'
सबको इनकी प्यारी सी हरकत देख हंसी छूट जाती है.
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Monday, June 26, 2023
शौर्य गाथा : 7 Days Without Mamma #Day4
कहते हैं नानियां नाती-नातिन में बेटी का बचपन खोजती हैं। शौर्य की नानी को शौर्य से अगाध प्रेम है। वो जब भी रहती हैं, दिन भर कुछ न कुछ खिलाती रहती हैं, नया-नया बनाती रहती हैं। शौर्य थोड़े से बीमार पड़े नहीं कि अगली गाड़ी से सीधे चली आती हैं। उनका प्रेम अदभुत है।
उम्र के साथ धार्मिक सभी हो जाते हैं, किंतु धर्म का मर्म समझ उसे अपने व्यवहार, विचार और आचरण में बहुत कम समाहित कर पाते हैं। नानी उन बहुत कम लोगों में से एक हैं।
पापा के ऑफिस जाने के बाद भाईसाहब दिनभर नानी और भाई- बहन (ममेरे) के साथ खेलते रहते हैं। यशी चार वर्ष की है और अपनी उम्र के जितनी चुलबुली किंतु उम्र से अधिक समझदार। भाईसाहब कभी धोखे से भी मार दें तो भी वो प्यार करना नहीं छोड़ती।
ईशान आठ वर्ष के हैं, धीमे धीमे बड़े हो रहे हैं। उनकी गलती पर हम डांट भी देते हैं किंतु शौर्य के प्रति उन्हें अत्यधिक प्रेम हैं।
इनके साथ खेलते हुए भाईसाहब मम्मा को भूले रहते हैं। आज दिनभर से सब डांस कर रहे हैं, नाना नानी वीडियो बना रहे हैं। पापा के लौटते ही नानी वीडियो दिखाती हैं।
आज चौथा दिन है, आज दिनभर में भाईसाहब ने मम्मा को कल से कम याद किया है, शायद Situation में ढल रहे हैं... मम्मा भी धीमे धीमे एडजस्ट कर रही है।
नाना ने भाईसाहब की मालिश कर दी है, दिनभर हाइपर एक्टिव रहे भाईसाहब भी थके हैं... वे कहानी सुनते सुनते बीच बीच में मम्मा को याद करते हुए पापा के पास सो जाते हैं।
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शौर्य गाथा: 7 Days Without Mamma #Day3
पापा ऑफिस के लिए निकल रहे हैं... भाईसाहब आते हैं, Shoelaces बांधना शुरू कर देते हैं।^ पापा उन्हें ढेर सारी पुच्ची करते हैं... " पापा दल्दी (जल्दी) आना, बनाना (Banana) लाना" ये डिमांड रखते हैं।
पापा शाम में जल्दी आना और बनाना लाना दोनों भूल गए हैं... नौकरी में समय पर वश नहीं होता है। पापा आते ही खेलना शुरू कर देते हैं।
भाईसाहब पापा को पेट के बल लिटाते हैं, पीठ पर एक तकिया रखते हैं फिर उसपर बैठ जाते हैं। पापा के दोनों हाथ पकड़ लिए हैं, जैसे हैंडल हों और "ऊं... ऊं..." की आवाज निकाल कहते हैं "पापा मेली मोटलसाइकिल।" "पापा आप स्टाट (start) हो।" अब मोटरसाइकिल बने पापा भी "ऊं... ऊं..." की आवाज निकाल रहे हैं।
15 20 मिनट तक मोटरसाइकिल चलती है। भाईसाहब मम्मा को याद करने लगते हैं। पापा "मोटरसाइकिल टनल में जानी है, अंधेरा होने वाला है।" कहते हैं, लाइट बंद कर दी जाती है।
पापा भाईसाहब को कंधे पर लिए हैं... दौड़ रहे हैं "ऊं... ऊं..." बोल साथ में मोटरसाइकिल की आवाज निकाल रहे हैं। भाईसाहब अर्धनिद्रा में आ गए हैं... धीमे धीमे मम्मा... मम्मा... बोल रहे हैं।
नाना उनके पैरों की मालिश कर रहे हैं, नानी उन्हें समझा रही है, पापा उनका फेवरेट खिलौना डंप ट्रक ले आए हैं। पापा बगल में लेट गए हैं... भाईसाहब खिलौना पापा के पेट पर चलाते हुए सो जाते हैं।
इनके सोने के बाद पापा मम्मा को फोन फोन करते हैं... मम्मा आंसू बहा रही है... पापा दिलासा देते हैं... इस तरह मुश्किल भरा तीसरा दिन भी निकल जाता है।
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Sunday, June 25, 2023
शौर्य गाथा : 7 Days Without Mamma #Day2
पापा उनके साथ खेलने लगते हैं, थोड़ा घुमाते हैं, पापा खुद थके हुए हैं तो लेट जाते हैं। भाईसाहब घरभर में घूम रहे हैं, दिन में नहीं सोए हैं तो नाना नानी सुलाने की कोशिश करते हैं और ये "टीवी देखना..." कह जोर जोर से रोने लगते हैं। आधे घंटे टीवी दिखाने के बाद पापा उन्हें सुलाने की कोशिश कर रहे हैं... "एक डायनासोर था... एक बेबी एलीफेंट था... एक टाइगर कब (Cub) था..." और जाने क्या क्या कहानियां... भाईसाहब "मम्मा... मम्मा..." कह सो जाते हैं।
रात (या सुबह) साढ़े चार बज रहे हैं... भाईसाहब यकायक से जाग जाते हैं... शायद कोई सपना देखा है। फिर "मम्मा के पास जाना है, मेरी मम्मा के पास जाना है..." कह बहुत तेज रोना शुरू कर देते हैं। इतना सारा कि देखने वाले के आंसू आ जाएं।
मनाने की पूरी कोशिश जवाब दे चुकी हैं। मम्मा को वीडियो कॉल लगाया जाता है। मम्मा डरी हड़बड़ाई सी उठी है, इतनी रात को कॉल देखकर... भाईसाहब को समझा रही है... "बेटा सो जाओ, सुबह आ जायेंगे... ऑफिस में बहुत काम है ना..." समझाते समझाते चुपके से खुद के आंसू पोंछ रही है।
भाईसाहब थोड़ा चुप होते हैं...पापा कंधे पर ले झुलाते हुए 'आओ तुम्हें चांद पर ले जाएं...' गाना सुनते हुए सुलाते हैं... तकरीबन साढ़े पांच बजे सोते हैं।
मम्मा अभी भी जाग रही है, पापा फोन लगाते हैं, वो लगभग रो देने वाली है... न शौर्य को आसान है, न मम्मा को...
#शौर्य_गाथा #Shaurya_Gatha








