Friday, December 2, 2022

भोपालनामा 11

         'यूनियन कार्बाइड' से तबाह और उससे ज्यादा खूबसूरती से आबाद हुए भोपाल से ज्यादा खूबसूरत जगह मिले तो बताना.

                         भोपाल तुम शहर नहीं, कुछ मरे और कुछ जिंदा लम्हों की निशानी हो, जिन्हें याद करके मैं फिर से जीने की तमन्ना जगाता हूँ, कहीं भी, किसी भी अजनबी शहर में. हर शहर में मैं अपना भोपाल बसा लेता हूँ!

                        इस शहर में फिर मौत आये तो मैं कहूँगा, 'रात में ही आना' क्यूंकि जागते रहे तो हमारे जिंदा रहने के इरादे जज़्ब नहीं होंगे और मौत यक़ीनन तुझे भागना पड़ेगा. 


02.12.2013. #Bhopal,  #Bhopal_Gas_Tragedy (2-3 Dec Night 1984 )

शौर्य गाथा : सीताफल

 


पापा ऑफिस से आए हैं, भाईसाहब सो रहे हैं. कुछ देर में भाईसाहब जागते हैं और पापा को hug कर लेते हैं. उन्हें जागते ही पापा पर बहुत लाड़ आ रहा है.

पापा अब तक की सबसे टफ टास्क - भाईसाहब को गोद में लेकर सीताफल खिलाने में संलग्न होते हैं. हर पॉड के बीज से दल को अलग कर भाईसाहब को खिलाना होता है. साथ में पापा भी खा रहे हैं. दोनों मिलकर 4-5 सीताफल चट कर जाते हैं.

मम्मा ऑफिस से आती है, दृश्य देख पापा को डांट पड़ती है. भाईसाहब को सर्दी जल्दी हो जाती है और शाम में सीताफल खिलाया जा रहा है! थोड़ी थोड़ी सर्दी तो उन्हें अभी भी है.

भाईसाहब मम्मा के पास जाते हैं और मम्मा से सीताफल की ओर हाथ से इशारा कर बोलते हैं मम्मा 'औल ताहिए.' पापा की हंसी निकल जाती है, मम्मा उन्हें लुक देती हैं.

रात में भाईसाहब को खांसी होती है, पापा पर डांट पड़ती है. अगले दिन डॉक्टर साहब सर्दी खांसी का कारण शाम में फल खाना बोलते हैं, पापा पर फिर डांट पड़ती है. दो दिन बाद दादू आते हैं, भाईसाहब को बीमार देखते हैं और पापा को फिर डांट पड़ती है.

पापा अकेले में भाईसाहब के पास जाते हैं उनसे रिक्वेस्ट करते हैं को बेटा आप जल्दी ठीक हो जाओ नहीं तो मैं डांट ही खाता रहूंगा. भाईसाहब बोलते हैं 'ओते पापा.'

बेचारे पापा ने घर में सीताफल लाने से ही तौबा कर लिया है.

#शौर्य_गाथा

Tuesday, November 29, 2022

शौर्य गाथा : Kisses



भाईसाहब पापा की गोद में बैठे हुए हैं. मम्मा को ऑफिस से आने में देरी हो गई है, तब तक पापा भाईसाहब का मन बहला रहे हैं. मम्मा आती है, भाईसाहब दौड़ के मम्मा की गोदी चढ़ जाते हैं, गले में हाथ डाल लेते हैं. मम्मा बहुत सारी चुम्मी देती है, भाईसाहब मम्मा के गाल हाथों में ले लाड़ जताते हैं. फिर भाईसाहब एक हाथ मम्मा के गले में ही डाल, दूसरे हाथ से पापा को पास बुलाते हैं. पापा पास आते हैं, भाईसाहब अपना हाथ पापा के गले में डालते हैं और अपना गाल पापा की तरह कर बोलते है 'ये...ये...' मतलब आप भी चुम्मी लो मेरी.

फिर पापा मम्मा एक साथ दोनों गालों पर चुम्मी देते हैं और भाईसाहब खुश हो जाते हैं.

#शौर्य_गाथा

Sunday, November 27, 2022

शौर्य गाथा : Shaurya's Dadu, Dadu's Shaurya




भाईसाहब के दादू आए हैं. अब वो मम्मा पापा को भी भूल गए हैं. अगर उन्हें साइकिल से उतरना है तो भले ही मम्मा पापा पास हों, आवाज आती है 'दा..दू...' बाहर झूले पे जाना है तो भी दादू ही लेकर जाएंगे, ग्राउंड में साइकिल चलाना है तो भी आवाज दादू को ही दी जायेगी 'दादू त..ओ.., दादू त..ओ...'


दादू भी उन्हें खुद की थकान भूलकर घुमाते रहते हैं.

कभी-कभी भाईसाहब पापा नाम लेकर 'वि..देत...' बोलते हैं अब दादू को भी उनसे क्यूट और तोतली आवाज में अपना नाम सुनने की इच्छा है. चाचू उन्हें दादू का नाम लेना सिखा रहे हैं. वो 1-2 दिन में सीख भी गए हैं. अब उन्हें किसी बात पर दादू की जरूरत है, वो चिल्लाते हैं 'दा..दू...' दादू सुन नहीं पाते हैं तो जोर से चिल्लाते हैं 'दादू... दा..दू... वि.. ब.. ल...' हम सब लोटपोट हो रहे हैं. चाचू और पापा को हंस हंसकर पेटदर्द हो गया है.

दादू ने भाईसाहब को खुशी से गोद में उठा लिया है और ढेर सारा प्यार कर रहे हैं और भाईसाहब की हंसी रूक नहीं रही है.

#शौर्य_गाथा

Saturday, November 26, 2022

शौर्य गाथा : Children's Day


 हल्के जाड़े वाली बड़ी खुशनुमा सी सुबह है. भाईसाहब की गुडमॉर्निंग हो गई है. जागते ही स्माइल करते हुए बोलते हैं, 'पापा...' सुबह और खुशनुमा लगने लगती है.

मैं उन्हें उठाकर Hug करता हूं और दो तीन बार चूमने के बाद बोलता हूं 'हैप्पी चिल्ड्रें'स डे बच्चा.' वो बदले में गले के दोनों तरफ बाहें डाल देते हैं, फिर बोलते है 'पापा... प्याये पापा...' अब सुबह और भी अधिक खूबसूरत लगने लगती है. जैसे सूरज लालिमा लिए धीमे धीमे आसमान चढ़ रहा हो, जैसे हवाओं संग कमरे में खुशबू फैल गई हो.'
मैं मुस्कुराते हुए लगभग उन्हीं के लहजे में बोलता हूं 'हम्म...' वो गर्दन मटका कर बोलते हैं 'पापा पुट्टी आई... पुट्टी (Potty).'
... और पापा को एहसास होता है कि हवाओं में जो फैल रही थी, वो खुशबू नहीं थी, कुछ और था।😀😄

Friday, November 25, 2022

शौर्य गाथा : 'वि.. देत.. पानी ताओ'

 


भाईसाहब को रात 8 बजे से 10 बजे तक सुलाने की पूरी कोशिशें की जा चुकी हैं लेकिन भाईसाहब तो भाईसाहब हैं. 'यदा मनः तदा कर्म.' इसलिए वो उछल कूद में ही लगे हुए हैं.

अब मम्मा उन्हें कुछ खिला रही हैं, पापा मम्मा को दृश्यम-2 देखने जाना है इसलिए दृश्यम के रिवीजन के लिए टीवी साथ में देखी जा रही है.

मम्मा पापा बोलती हैं, 'यार विवेक, इन्हें पीने पानी ले आओ न.' पापा अजय देवगन की 'दो अक्टूबर वाली कहानी' में उलझे हैं, टीवी पर आंख गड़ाए रहते हैं.

अब भाईसाहब मम्मा की गोदी से उठते हैं, पापा के पास आते हैं, पापा का हाथ पकड़ते हैं और तेज आवाज में बोलते हैं 'वि.. देत.. पानी ताओ... पानी...'

पापा मम्मा की हंसी छूट जाती है. पापा पानी लाते हैं, भाईसाहब अपनी छोटी सी चोंच डालकर पानी पीते हैं. पापा उनसे पूछते हैं 'ठीक है?' भाईसाहब बोलते है 'ती..क... है'

रात 11.30 बज गए हैं. भाईसाहब अपनी कार पे बैठ हॉल में घूम रहे हैं, पापा मम्मा उनके थकने का इंतजार कर रहे हैं.

#शौर्य_गाथा

शौर्य गाथा : पा..पा.., पा..पा.. वि.. देत..



 इनकी मम्मा मुझे आवाज दे रही हैं 'विवेक... विवेक...' मैं मोबाइल में घुसा हुआ हूं इसलिए सुन नहीं पाता हूं. इतने में भाईसाहब एक्टिव हो जाते हैं. दूर से चिल्ला कर कहते हैं 'वि.. दे.. त.. मम्मा बुलाई.' मैं उनके बोलने पर हंस देता हूं लेकिन जानबूझकर इग्नोर करता हूं तो ये फिर से आवाज देते हैं 'विदे.. त.. मम्मा बुलाई' अब मैं इनकी ओर देखता हूं और भाईसाहब क्यूट सी स्माइल करते हुए कहते हैं 'पा..पा.., पा..पा.. वि.. देत..'

अब मम्मा इन्हें मोरल एजुकेशन का पाठ पढ़ाती हैं, 'पापा को पापा कहते हैं नाम नहीं लेते.' इतने में मैं बोल देता हूं 'निधि... निधि...' और भाईसाहब शुरू हो जाते हैं 'नि.. धी... पापा बुलाई.' 😃
अब मम्मा मुझे घूर रही हैं.😄

Wednesday, November 23, 2022

शौर्य गाथा : श्रवणकुमार

 


भाईसाहब लीलाधर हैं. उनकी लीलायें देखकर ऐसा लगता है कि बस देखते ही रहें. तीन चार दिन से सर्दी ज़ुकाम से पीड़ित थे, आज कुछ राहत में हैं. राहत मिलते ही लीलायें शुरू हो गई हैं. रात के पौने ग्यारह बज रहे हैं और भाईसाहब की आंखों में नींद नहीं है. उनको सुलाने के सारे जतन किए जा चुके हैं और सारे ही व्यर्थ गए हैं. थककर पापा बोलते हैं 'बेटा, अब हम थक गए हैं और आपको सुलाने के चक्कर में हमें Headache भी होने लगा है.'

भाईसाहब ने ये सुना और पापा के पास आए और पापा के गाल पर प्यार से हाथ फेर बोले ' प्याये.. प्याये.. पापा', फिर बड़े जतन कर भाईसाहब पलंग से नीचे उतर गए हैं. जबतक हम कुछ समझ पाएं उसके पहले ही ड्रेसिंग टेबल पर रीच में आई कोई सी शीशी उठा लिए हैं. बड़े जतन से फिर बेड पर चढ़े हैं.
जैसा हम उनकी मालिश करने के लिए तेल की शीशी को उल्टा कर हथेली में तेल लेते हैं वैसे ही उन्होंने बंद शीशी को किया और पापा के पास खड़े होकर पापा के सर की मालिश शुरू कर दी है. पापा मम्मा उनकी यह लीला देख हंस देते हैं और उन्हें रोकते हैं लेकिन वे मानने को तैयार नहीं हैं. पापा को सरदर्द है और कुल उन्नीस महीने के हमारे श्रवणकुमार सेवा में लग गए हैं.
उनकी नन्हीं कोमल हथेलियों का स्पर्श बहुत प्यारा लग रहा है इसलिए पापा भी थोड़ी देर उन्हें ये करने देते हैं. थोड़ी देर वह मुस्कुरा कर करते रहते हैं और फिर कहते हैं ' फि..नि...च्छ' (Finish). नया शब्द है जो अभी अभी ही सीखा है.
लेकिन अब मम्मा को भी उनकी लीला का लालच आ गया है. उनकी इस हरकत पर किसी को भी आ सकता है. इसलिए मम्मा बोलती है बेटा मेरे पांव में भी दर्द है... और भाईसाहब उनके पांव की मालिश करना चालू कर देते हैं. मम्मा उन्हें पकड़कर जोर से गले लगा लेती है. 😃

#शौर्य_गाथा : भरत मिलाप


 भाईसाहब और भाई का दिवाली मिलन हुआ और ये भरत मिलाप से कम नहीं था. कारण ये था कि भाई को मम्मा पापा ने तीन हफ्ते पहले से ये सिखाया कि 'आपको भाईसाहब को मारना नहीं है, वो आपके भाई हैं और उनको प्यार किया जाता है.' भाईसाहब को उनके मम्मा पापा ने ये कह तैयार किया कि 'वो बड़े हैं और उन्हें छोटे भाई को प्यार करना है.' फिर क्या था, दोनों मिले और सब रिएक्शन का फोटो लेने के लिए तैयार खड़े हो गए.

इतना प्यार तो शायद भाईसाहब के पापा, चाचू, छोटू चाचू ने भी कभी नहीं दिखलाया होगा. 😃

शौर्य गाथा : दौड़

 


भाईसाहब ने जबसे चलना सीखा है बहुत तेजी से भागते हैं. इतना कि मम्मा-पापा तो क्या कॉलोनी का कोई भी व्यक्ति न पकड़ पाए. लेकिन जब थक जाते हैं तो बस 'प्यारे प्यारे पापा' कह, हाथ बढ़ा बढ़ा कर 'पापा मुझे गोदी ले लो' की ज़िद शुरू हो जाती है... और जैसे ही थकान मिटे तो फिर वही कहानी शुरू... मम्मा-पापा की विपरीत दिशा में दौड़ चालू. 😃😃

#शौर्य_गाथा