प्यार करना बहुत ही सहज है, जैसे कि ज़ुल्म को झेलते हुए ख़ुद को लड़ाई के लिए तैयार करना. -पाश
Friday, March 21, 2014
Saturday, March 8, 2014
Sketch : श्वेता
तेरी मुस्कान, गोल चेहरा
एक छलकता बचपन-
निश्छल, निर्मल, निष्कपट.
जब भी तू हंसी
निर्मल, निर्झर-निर्झर...
मैं खोया, बस खोया.
मेरा गाना, तेरा रोना,
मेरा फिर-फिर गाना
तेरा फिर-फिर रोना.
कोई गान नहीं
जो तुम्हें हंसा न सके,
तुम्हें झूठा रुला न सके.
शुक्र है,
बस ट्रैन बढ़ रही है,
तुम अभी भी ज़िंदा हो,
मेरे अंदर... असीम तक.
Sketch : प्रतीक्षा
चलती ट्रैन, नपते रस्ते,
ओझल होते दृश्य.
बस एक तुम्हारा चेहरा है
जो अँधेरे डब्बे में भी
आँखों में चमक रहा है.
तेरा कन्धा मेरा सर,
तेरी हंसी, मेरी मुस्कान,
तेरा गुस्सा, मेरी चुप्पी,
'तेरे पप्पा का', मेरी हंसी.
तेरा रोना, मेरा रोना,
तेरा हँसाना, मेरा खुश होना.
रिश्ते बस जन्म से नहीं बनते,
यकीनन
रिश्ते हमसे बनते हैं.
हमसे-तुमसे...
बस हमसे और तुमसे.
Tuesday, February 25, 2014
खून बहाने वाले तुम्हीं थे
मैंने खून से कहा-
मत बहा कर इतना
देख सदियों तू बहा
इतिहास बना,
और बच्चों को पढ़ना पड़ता है वो इतिहास,
दर्ज़ करनी पड़ती हैं तमाम तारीखें
फ़ैल-पास का उठाना पड़ता है जोखिम.
'बहाने वाले तुम्हीं थे,
इतिहास में दर्ज़ करने वाले तुम ही.
लालसाएं तुम्हारी, लोलुप्त तुम
अपनों का खून बहाते रहे.
निहायत ही बेवकूफ इंसान,
ईश्वर ने तुम्हें इसलिए जन्मा था?'
खून तल्ख़ी से बोला
....और अब मैं बिलकुल चुप था!
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Monday, February 24, 2014
मुक्तिबोध, चाँद का मुंह सच में टेड़ा है.
उसकी कत्थई आँखों में देखता हूँ जी भर,
अपलक निहार-निहार
निश्छल,
निर्मल,
निष्कपट,
मेरे सौम्य-शीतल चाँद.
जैसी तमाम पदवियां
लुटाता हूँ बार-बार.
एक दिन
उसकी कत्थई आँखें
मेरे वक़्त का तकाज़ा कर
फेर लेती हैं नज़रें!
मैं जोर से चीखता हूँ
'मुक्तिबोध, चाँद का मुंह सच में टेड़ा है.'
कवि बेवकूफ़ होते है,
बेहद बेवकूफ़!
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poem
Sunday, February 23, 2014
Friday, February 21, 2014
Friday, January 31, 2014
Don't know, what to 'title' it. Its not a poem, its just what i felt today...
हर व्यक्ति बदलना चाहता है तुम्हें,
अपनी नज़र से.
हर व्यक्ति के लिए तुम हो,
अच्छे कभी, कभी बुरे.
उसकी नज़र, बस उसकी नज़र से
देखेगा तुम्हें वो...
चाहे तुम सही रहो या गलत!
दुनिया बहुत छोटी है,
सोच के मामले में.
दुनिया बहुत तिरछी है,
नज़र के मामले में.
तू अपनी धुन बजाता चल,
गीत खुद का गाता चला,
दुनिया की टेड़ी नज़रों को
अपनी नज़र दिखाता चल.
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