Friday, April 15, 2011

....तुम्हारी दी कलाई घड़ी!

याद है,
लम्हे बाँधने के लिए,
तुमने कुछ दिया था!

मैं,
लम्हे बांधते-बांधते थक गया,
लेकिन ये युग
अनवरत अग्रसर है!

मैं नहीं चाहता,
बहने दूं इन पलों को.
.......बस थामना चाहता हूँ,
तुम नहीं
 तो तुम्हारी यादें.

लेकिन,
सिर्फ और सिर्फ 
मुझे तुमसे बाधें रख सकती है,
नहीं थाम सकती लम्हें.
सोचता हूँ,
उतार के फेंक दूं
तुम्हारी दी कलाई घड़ी!

तुमसे दूर जाने का ये प्रयास भी
कर के देख लूं!
....उम्र भर सीने में चुभें लम्हे,
उससे तो कहीं यही अच्छा है!!!

Saturday, April 9, 2011

....before packing the bags: inside campus

                              मैं उसे कस के पकड़ता, उसके शरीर पर खड़े हो रहे रोंगटे साफ़ देख सकता हूँ....वो बिलकुल पास है, इतने पास की कभी उसने खुद भी नहीं सोचा होगा की वो मेरे इतने करीब होगी....मैं उसके चेहरे को और भी खूबसूरत बना रहे  बालों को अलग करता हूँ.......उसका चेहरा मेरे बिलकुल पास है, उसकी गर्म साँसे मैं महसूस कर सकता हूँ.....और फिर............'हे  भगवन! हम पूरे पांच मिनट तक  'kiss' करते रहे!!!! इतना लम्बा kiss तो इमरान-दिया मिर्ज़ा ने  'तुमसा नहीं देखा' में भी नहीं किया होगा'

                   'तुम 'idiot' हो' वो mirror में अपनी lipistic' सम्हालते हुए बोलती है.
                   'हाँ, its ur first kiss na? मेरा भी, and i am so happy.' मैं अपना चेहरा धुलते हुए बोलता हूँ.
                  'हाँ लडको के लिए तो ये proudest moments होते है, तुम तो खुश होगे ही.' वो मेरे कंधे पर                                            मारती है. मैं उसके सिर पे हाथ घुमा देता हूँ......उसके बाल बिखर गये हैं, और वो और भी प्यारी लगने लगी है.

पहले मैं toilet से बाहर निकलता हूँ, और गेट के साइड में खड़ा हो गया हूँ, जिससे उसे कोई  boys toilet से निकलते हुए देख ना ले. वो धीरे से निकलती है, बालकनी में कोई नहीं है, सब lectures करने व्यस्त हैं.....वो तेजी से क्लास की और जाती है.
              
                'May I come in Sir?'
              
                'No'  28 साल का 'Control System' पढ़ाने बाला आदित्य उसे ऊपर से नीचे तक Scan करके बोला. (ये Young Faculties की प्रॉब्लम क्या होती है यार? ये अपनी स्टुडेंट्स तक को नहीं छोड़ते.)

              'You are 20 minutes late.' 5 फुट 4 इंच का आदित्य, अपने पीले पेंट से चाक भरे हाथ पोंछते हुए बोला. एक तो इतनी कम Height, फिर ऊपर से मोटा सा चश्मा, उस पर भी ज्यादातर वो डार्क शर्ट पर लाइट पेंट्स पहनता है, राजपाल यादव का पूरा भाई लगता है वो.....लेकिन अपनी स्टुडेंट्स तक पर लाइन मारता है.......मेरी उससे कभी नहीं बनी.
        
            'सॉरी सर, मैं ATM तक पैसे निकालने गयी थी.'


            'आ जाओ.' 'और तुम कहाँ गये थे हीरो?' नीरजा के पीछे मुझे खड़ा देख बोलता है.


            'सर उसको पैसे निकलवाने' पूरी क्लास हंस पड़ती है.


उसका चेहरा देखने लायक है, 'तुम मेरी क्लास कभी Attend मत करना, बाहर जाओ.'


मैं चुपचाप Gate से निकल आया, मन ही मन उसे दो-चार भद्दी गलियाँ देता हूँ.


एक...दो.तीन...पूरी 63 सीढियां उतरने के बाद मैं कंप्यूटर सेंटर पहुँचता हूँ.....यहाँ पूरे dell के computers हैं, इनका के बोर्ड चलाने में मुझे मज़ा आता है, lappy का की-बोर्ड use करना कितना tough होता है ना!


        .मैं सीधा जाकर एक कंप्यूटर पर बैठ गया.....प्रोक्सी साईट से अपना फेसबुक अकाउंट खोलता हूँ....(हाँ, हर एक कॉलेज की तरह यहाँ भी chatting sited बंद क़र के रखी गयी हैं.) ....टोटल 23 notifications ......maximum about comments on my photo ........ 


                 'क्या कर रहे हो यार? मुझे नौकरी से निकलवाओगे क्या?'


मैंने पीछे देखा, पवन था. 'क्या यार पवन, यहाँ फेसबुक तक नहीं खोल सकते.......ये कॉलेज है या आफत?'


पवन lab assistant है, 19 साल का लड़का, BCA final year में है , और data networks and communication  में मास्टर है....part time मेरे कॉलेज में 6000 रूपये महीने पर जॉब करता है....ये जब जॉब के लिए आया था तो lab in-charge रावत के सामने मैंने इसका support किया था, तब से मेरा अच्छा दोस्त है. उसके पास पैसे की तंगी रहती ही, पापा नहीं है...शहर से काफी बाहर रहता है....लेकिन बहुत स्वाभिमानी है, और मेरा बहुत अच्छा दोस्त भी.


            'क्या यार विवेक, तुम भी, वो रावत मुझे डांटेगा अभी.'


            'एक तो वैसे ही मूड ऑफ है ऊपर से तुम भी......'
        
           'फिर नीरजा से लड़ाई?'
          
            'नहीं यार she is a good girl ..... साल्ले मेरी एक faculty ने नाटक किया.....'
          
             'चलो छोडो यार, कोई ब्लॉग पढो, तुम्हे अच्छा लगेगा....वैसे, आज में दोस्तों को पार्टी दे रहा हूँ, आओगे?'


             'कहाँ?'


            'वृन्दावन ढाबा, 8.30 बजे'


            'किस ख़ुशी में?'
          
            'वहीं बताऊंगा'


           'ठीक है, फिक्स 8.30 पर वहीं मिलता हूँ.'


 '......सुरीली अंखियों बाली, सुना है......' मेरा फ़ोन बजता है, ....oh! god ये भी silent पर नहीं था......
मैं कंप्यूटर रूम से बाहर निकल कर बात करता हूँ.


              'चलो आदित्य की क्लास ख़त्म, मैं gate पर हूँ, तुम्हारा wait कर रही हूँ.....घर चलते हैं.' आदतन नीरजा बिना मेरा जवाब जाने ही फ़ोन काट देती है.


                                               *******


                'ये मेरी स्कूटी है और मैं चलाऊँगी, पीछे बैठो.' वो मुझे अपना बैग पकडाते हुए बोलती है.


                'हाँ, तू और तेरी सड़ी सी पिंकी.'
            
                 'just shut up '


पिंकी उसकी पिंक कलर की स्कूटी का नाम है......लडकियां कितनी अजीब होती हैं, अपने taddy , lappy से लेकर स्कूटी तक का नाम रख लेती हैं.


               'कल coaching में मिलते हैं, टेक केयर....'
              
               'you too, और हाँ, मेरे लम्बू-पंडित का भी ख्याल रखना.'
            
               'shut up, he is my papa. he is a nice guy .'
            
               ' i know ........bye '


               'byeeeeeeeeeeeeeeeee '


नीरजा चतुर्वेदी के 6 .3" लम्बे पापा Mr. R . V . चतुर्वेदी को मैं पसंद नहीं हूँ......शायद मैं थोडा rude हूँ, या शायद उनके बाद नीरजा के सबसे करीब....या शायद he is over -protective to her daughter.......जो भी है but overall he is a nice guy .

Thursday, April 7, 2011

BakBak: Yeh Saali Zindagi

        Enrique चाचू के पाँचों एल्बम बार-बार सुनने के बाद अब नये सिंगर को खोजा जा रहा है,  और खोज ख़त्म हुई है Arash पर, इनके फारसी गाने समझ में न आये लेकिन ताश के पत्तों के बीच  सिर्फ म्यूजिक ही याद रहता है, इसलिए हमें ज्यादा फर्क नहीं पड़ता...... इसके साथ  'Always' सोंग गाने बाली Aysel की आवाज़ तो 'सुपर सेक्सी' है....दोस्त की बात सुन हम हँसते हैं.......2 महीने का कॉलेज, फिर पकाऊ ज़िन्दगी, कॉलेज के इस तरफ हम ज़िन्दगी को घुमाते हैं, और उस तरफ ज़िन्दगी हमें......'रंग दे बसंती' का हर डायलोग सच नज़र आता है.....

      'सॉरी, वो उस दिन के लिए तुम गुस्सा तो नहीं थे न?' वो बोलती है......दुनिया की जहां आधी आवादी को खाने को नहीं मिलता है, जहां 66% भारतीय बच्चे कुपोषित हैं, जहां सरकारें बजट का 70% तक खुद डकार जाती हैं, और बच्चे 'माँ की हड्डी से चिपक ठिठुर, जाढे की रात बिताते हैं', वहीं इन्हें इन फ़ालतू के Emotions की पड़ी है, कितने लकी हैं हम जिनका पेट भरा है, तो इश्क के बारे में सोच तो सकते हैं. अभी इतनी रात को फुटपाथ पर भूखे बैठे होते तो चाँद में भी रोटी नज़र आ रही होती, उसकी शक्ल नहीं.......मैं मेरे पापा को थैंक्स कहता हूँ की उन्होंने इतना कमाया की हमारा पेट भरा है और इतना Capable बनाया की अपना पेट भर सकता हूँ, जबकि देश की आधी आवादी मूलभूत रोटी, कपडा और मकान के लिए तरश रही है........और इसलिए भी की उन्होंने उस वहां हेल्थ फेसिलिटीज़ दी, जहां से एक ढंग का अस्पताल 50 किलोमीटर दूर है, और जाने के साधनों में सिर्फ ट्रेक्टर है.....बेचारा बीमार तो पहुँचते-पहुँचते ही मर जायेगा......
             ' तुम Administration (PSC) की तैयारी करो, तुम्हारा GK अच्छा है.'......मेरे अन्दर एक प्रश्न है, अफसर बनकर किसपर हुक्म चलाओगे? यहांके आधे लोग इतने भूखे की एक हज़ार रूपये के लिए कई जान ले ले और साहूकारों के सामने बहु-बेटियाँ तक चढाने को तैयार हैं, जब कुछ भी नहीं है बेवसी में आत्महत्या कर रहे हैं या इतने सताए की आप उनपर अपना शासन चला के भी कुछ नहीं उखाड़ पाओगे, हज़ारों बर्वरता से पुलिस द्वारा मारे जाते हैं, और आतंकी या नक्सली करार कर दिए जाते हैं, या कुछ इतने निष्ठुर की चंद पैसों से आगे उनके सोचने की क्षमता नहीं जाती......कभी-कभी लगता है, हम उस दल-दल के कीड़े है, जिन्हें रेंगना है, और वो भी उतना ही जितना की सरकार हुक्म दे.....हुक्मरानों की बिछाई बिसात पे मोहरे बदले जाते हैं और हम तो वो पैदल भी नहीं जिन्हें जंग में ही सही कम से कम इज्ज़त की मौत तो नसीब होती है......मैं कभी-कभी चीखना चाहता हूँ, कि मैं इस दल-दल का हिस्सा बनना नहीं चाहता.

                 सड़क पर कचरा बीनने बाले बच्चे 'Right to Education' पर गन्दा मज़ाक लगते हैं, उन्ही में से कोई सड़क पर हादसे का शिकार हो जाये.........और उसके शरीर को उठाने बाला भी कोई न हो तो........!!!.......... लावारिश सी ज़िन्दगी में वो लावारिश लाश ज़िन्दगी भर याद रहेगी. 

कुछ हाल भोपाल की सडको से--

                  




              ******

अन्ना हजारे, तुम्हारे प्रयास व्यर्थ न जाये.........तुम्हें प्रणाम!!

Thursday, March 3, 2011

'हर एक दिन चांदनी की तरह.......

             इश्क की बायलोजी हमें कभी समझ ना आई, प्यार उससे हुआ जो 10 में से 7 दिन गुस्सा रहती है. शायद जन्नत में इश्क जनने बाले को भी लगता होगा ये क्या बना दिया..... इश्क जब बदबू देने लगता है तो लगता है किसी हाई-वे पे लगे 6-7 घंटे के जाम में आप फंसे हैं और म्यूजिक सिस्टम तक 'टाइम पास' करने के लिए नहीं है, और साल्ला पीछे भी नहीं जा सकते, और 'यू-टर्न'  भी नहीं ले सकते........दिल का मामला है, फंसता है तो दर्द बहुत देता है.
                   भाई आया है, आते ही बोलता है, इतना गन्दा रूम, कैसे रहते होगे........बालकनी में पड़े कचरे के ढेर को देख उसे आश्चर्य होता है. सुबह उसे लगता है कितनी बोरिंग लाइफ है तुम्हारी.....और रात को जब 10 बजे से पत्ते शुरू हो जाते हैं, और ENRIQUE चाचू के गानों के बीच फड़ जमती है.......फिर रात 1.00 बजे की 'मैगी' नूडल्स,  तो उसे लगता है कितने एश कर रहा हूँ....लेकिन फ़ालतू अभी भी हूँ. 'विवेक भैया' तुम्हारे पास कुछ काम तो है नहीं. हम बेचारे भी बस मुस्कुरा के रह जाते हैं.  कैसे बताये MBBS बालों की तरह 11-11 घंटे पढ़े तो सटिया ना जाएँगे.
        ये कुछ नया सा है, जैसे RODIES 8.0  के ओडिसंस देखना सबको पसंद है, दूसरों को गालियाँ मिलती हैं, तालियाँ हमारे रूम में बजती हैं. मसलन चीजें अच्छी ना होकर 'सेक्सी' हो गयी हैं, जैसे हम 'होटल राजहंस' खाना खाने इसलिए नहीं जाते क्यूंकि वहां की सब्जियां हमारे रूममेट को 'सेक्सी' नहीं लगती और मेरे पास बाइक इसलिए नहीं है क्यूंकि मेरे भाई को 'सेक्सी बाइक' चाहिए और 1st इयर में ही उन्हें 'सेक्सी बाइक' देना पापा को मुनासिब नहीं है.
    कॉलेज की चारदीवारी से निकलने का वक़्त हो गया है, लेकिन चाहत किसी की नहीं है. चाहत हो स्कूल से निकलने की भी नहीं थी. विपिन बोलता है नवोदय ग्रेजुअशन तक होना चाहिए..........'और ग्रेजुअशन का टाइम कम से कम 5-6 साल, B. Tech जैसा 4 साल नहीं, अमित हाँ में हां मिलाते बोलता है.........' वैसे  5-6 साल का ग्रेजुअशन का कौन सा कोर्स होता है?' एक नया प्रश्न उठा है..........'MBBS का'.......'तो रहने दो, हम नही कर पाते, इतना पकना अपने बस में नहीं'......और सब हंस पड़ते हैं, भाई का चेहरा देखने लायक है.
           हम अपने दोस्त की इंटरव्यू की प्रेक्टिस करा रहे है.......' What's your name?' .......... 'What's my name, What's my name, माय  नेम इज़ शीला, शीला की जवानी'.........Interview की जगह पूरा रूम कॉमेडी सर्कस का मंच बन गया है.
              पता में 62 Kg का हो गया हूँ,......'तुम मज़ाक कर रहे हो, अभी पिछले साल तो तुम 53 के थे' उसको बिलीव ही नहीं होता है..... 'हाँ, और तुम 42 Kg की हो, ज्यादा मत इतराओ'...........'So What, I Have a Perfect Figure'.........मैं जोर-जोर से हंस देता हूँ. वो फ़ोन रख देती है.......'साल्ला जब से करीना ने Zero Figure बनाया है लडकियां इनविज़िबल-सी दिखने लगी हैं, दूर से देखो तो पता ही नहीं चलता की वहां कोई खड़ा है, 'हम आपके हैं कौन' की माधुरी भी इनके चक्कर में आंटी लगती है' बातें सुन रहा बगल में बैठा दोस्त बोलता है............हम बड़ी देर तक हँसते रहते हैं.
         कॉलेज में 'आरक्षण' फिल्म की शूटिंग का 'कैंटीन का सेट' अभी तक बना हुआ है, वहीँ खड़े होकर हम सैफ, दीपिका की तरह एक्टिंग कर रहे हैं, और बीच में हंसी के ठहाके...........मुझे लगता है जैसे गूंजती हंसी बस कुछ दिन की बची है, एक दिन की चांदनी की तरह.....3 महीने बाद हम कहाँ, तुम कहाँ!!
चार साल चार दिन की तरह गुजर गये, यहाँ तक की सचिन को भी 200 रन बनाए एक साल हो गया..और हमें आज भी लगता है जैसे ये कल की ही बात है. 

Wednesday, February 16, 2011

BakBak...2

वो कह रहे हैं 'इश्क की Biology तुम्हें समझ नहीं आएगी, तुम्हें हर दूसरी लड़की से प्यार हो जाता है. मूवी देखने के बाद हीरोइन से भी.' मैं मुसकुराता हूँ.
' मुझे जॉब मिल जाये, मैं Settle हो जाऊंगा, उससे शादी कर लूँगा. उसका बाप भी मानेगा. वैसे भी हर लड़की का बाप विल्लैन होता है.' मैं हाँ में सर हिलाता हूँ. मेरे Senior हैं.
आज फ़ोन बजता है, फ़ोन पर वही सीनिअर हैं. 'यार कैसा है?.... 'ठीक हूँ सर.' ....'कोई नई मिली की नहीं?'.....'नहीं, आपके क्या हाल हैं?  मै'म कैसी हैं?'....'यार हमारा ब्रेक-उप हो गया है. उसने वहीं TCS में ही अपने Colleage से शादी कर ली है. हम दोनों ही स्विच नहीं कर सकते था ना!'.............ये इश्क भी अजीब हो गया है. बिलकुल Fastrack के Ad की तरह. एक Break-up कि दूजी कहानी शुरू. मैं शुरू में B-tech में आकर Pendrive-Pendrive खेलता था. अब सिटी बस का ड्राईवर Pendrive से गाने चलाता है म्यूजिक सिस्टम में. 'क्या करें भैया एक GB की है, इसके पूरे गाने सुन लिए, दूकान बाला 50 रूपये लेता है भरने के, इसलिए नहीं डलवाए. यही बजाने पड़ रहे हैं.'.......'पता एक समय MACT (MANIT) बाले किराया नहीं देते थे बस का. ........मैं मुस्कुराता हूँ, आप Bike नहीं चलाते हैं क्या?....'नहीं'....'क्यूँ?'..'येसे ही.'......'सही है, पिछले साल 65 लड़के मर गये Bike से' मैं कुछ नहीं कहता हूँ. ज़िन्दगी कितनी फास्ट हो गयी है, Racing Bikes और ज़िन्दगी की Race एक सी लगती है. तुम Bike से Race करो और ज़िन्दगी की भी. देखते हैं Bike Race जीतते हो या जिंदगी की Race.
       'तुम्हें करना क्या है?..'पता नहीं'...'एक बार प्लेसमेंट हो जाये तो जो करना हो करना, कांफिडेंस बढ जायेगा.' उनकी मुस्कान का राज आज समझ आता है, अब कांफिडेंस है, लेकिन प्रश्न स्थर है- 'मुझे करना क्या है.?'


PSC कि तैयारी शुरू की है, कुछ प्रश्न आपसे भी-
--' Amazon नदी बड़ी है या Amazon.com Book selling site?'
--'देश का सबसे बड़ा बैंक कौन सा है? RBI या A. रजा (एक्स-टेलिकॉम मिनिस्टर) का घर?'
--'आप क्या पसंद करेंगे,  एक इंजिनियर बनना या सोनिया गाँधी के यहाँ खाना बनाना? इंजिनियर बनने से 40000-50000 महीने कमाएंगे, और सोनिया जी रसोई सम्हालने से राष्ट्रपति बन जायेंगे. (जैसा कि राजस्थान के एक मिनिस्टर ने टिपण्णी की थी.) फैसला आपका.'
--...और सबसे अहम सवाल, कमेंट्स में इसका Answer जरूर दें- ' हमने अंग्रेज शासन में ज्यादा तरक्की कि या स्वतंत्रता के 63 सालों में?'

Tuesday, February 8, 2011

Kahi-Ankahi

july-agust-sept 1999....
मैं 21 जुलाई को आया हूँ, बाकियों से 2 दिन Late....सब 19 को आ गये थे, मैं 21 को. पापा ने हॉस्टल में छोड़ते वक़्त कहा है, वो परसों मिलने आयेंगे. एक भैया से भी मिलवाया, वो 8th में पढ़ते हैं, उनके पापा मेरी मम्मी के स्कूल में Teacher हैं. पहला दिन है, कुछ-कुछ अच्छा लग रहा है, मैं वैसे भी मम्मी-पापा से अलग नाना-नानी के घर रहा ही हूँ. मुझे Bed नहीं मिला है, किसी के साथ शेयर करना पड़ेगा (अरे 10 साल के तो हैं सभी, एक Bed पे दो क्या तीन लोग भी आ सकते हैं) रवीश के साथ मैं Bed शेयर कर रहा हूँ (एक दिन रवीश ने अपनी मम्मी मेरी शिकायत भी की, कि मैं Bed पे सामान फैलाता हूँ. :)). उसके पापा पहले से ही मेरे पापा को जानते हैं, लेकिन हम एक ही जगह से नहीं हैं. सोते वक़्त येसा लगा जैसे नाना के यहाँ सो रहा हूँ, लेकिन बगल में नानी नहीं सो रही थी, 'समझदार बहू' की कहानी सुनाते हुए, या मौसी ने भी दूध से भरा गिलास नहीं दिया सोते वक़्त शाम का खाना भी ज्यादा अच्छा नहीं लगा.
सुबह से बड़ी जल्दी उठा दिया, बेचारा नन्ही सी जान, PT भी करनी पड़ती है, 5.30 से. अच्छा नहीं लगा मुझे इतने जल्दी उठना. सुबह के 8.00 बजते-बजते घर कि याद सताने लगी, इतने ज्यादा अनुशासन में तो कभी रहा नहीं हूँ ना! श्याम के साथ Main Gate पर गया, वहीं बैठे हम रोते रहे (बाद में श्याम बिहारी ने स्कूल छोड़ दिया.).......पापा फिर आये हैं, मैं उनके सामने रो रहा हूँ, पापा को भी 50km गाड़ी चलाते हुए आना पड़ता था. उन्होंने लालच दिया है, नए कपड़ों का और स्कूल कि Computer Education का, बेटा कंप्यूटर 70 हज़ार का आता है (उस वक़्त, बाद में मैंने लैपटॉप लिया और पापा को आजतक Use करना नहीं सिखा पाया हूँ.) और बाहर किसी भी स्कूल में सिखाते भी नहीं (बाद में मेरे कंप्यूटर Teacher ने Black & White Screan पर हमे सिर्फ गेम ही खिलाया, और कुछ भी नहीं सिखाया, और मैंने स्कूल में कंप्यूटर पर Game खेलने के कम मौके मिलने के कारण घर पर Video Game ले लिया :)). मैं फिर भी रो रहा हूँ लेकिन मैं कुछ-कुछ खुश हूँ कि मैं औरो से दो दिन Late आया, उनसे दो दिन ज्यादा घर पे रह लिया. अमित से कहा भी.
.......मैं 'पानी कि टंकी' पे बैठा रो रहा हूँ, अलका Ma'am ने उठाया और क्लास ले गईं. मैं जबरदस्ती उनके हाथ से छिटकने कि कोशिश कर रहा हूँ. वो हंस रही हैं, शायद अपनी स्थिति पर भी और मेरे पर भी.

प्रसाद सर ने Chess लाकर दिया है, उनकी लड़की को भी बहुत पसंद है, और मेरा तो Favourite गेम ही है. मेरे नाना expert हैं इसमें, और मुझसे झूठ-मूठ का हार भी जाते थे. मैं खेलता हूँ. बहुत दिनों तक मैंने उनका Chess वापिस नहीं किया और उनकी बेटी मांगती रही.
चाचा आये हैं, मैं पहली बार उन्हें चाचा कहा, घर के बाकी लोगों को देखकर मैं भी उन्हें उनके नाम से बुलाता था. बारिस हो रही है, मैं चाचा के जाने के बाद रोने लगा.....अनुराग उन्हें बुलाने Main Gate तक गया है, भीगता हुआ. चाचा मुझे मना रहे हैं, और मैं TC लेने कि बात कर रहा हूँ.
1 महीने मैं गिनकर 47 letters लिख चुका हूँ, कुछ पापा-मम्मी को, कुछ दादी (बाई)-दादा को, कुछ मौसी को. सब में एक ही बात है, मेरे लिए और सामान मत लाना, मुझे TC चाहिए.
...मुझे अभी पता चला है, वहां  का भी मम्मी रो-रो कर बुरा हाल है. हाँ, पापा ने नये कपडे खरीद कर दिए हैं.

March 2006.....
आखरी पेपर था, हिंदी का, हिंदी वैसे भी मेरी ठीक है. सब जाने कि तैयारी में हैं, 7 साल बाद स्कूल छोड़ रहे हैं. मेरे पास कैमरा भी नहीं है, कि फोटो ले सकूं. पहले मंगाने का ध्यान ही नहीं रहा, exams में busy था. किसी ने कहा, तुम 6th में दो दिन बाद आये थे. मैं सोच रहा हूँ, काश दो दिन और रह लेता....मैं Bed पर बैठा हूँ, माधव suitcase बंद कर रहा है (मुझे याद है उसने 12th में कभी suitcase lock नहीं किया.) हरिनारायण मेरे बगल में बैठ गया है......बड़ा emotional होके कहता है, 'विवेक तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे'  मैं फीका सा मुस्कुरा देता हूँ (उस Emotional Fool को कोई कभी नहीं भूलेग:)). राजेश जा रहा है, 6th में हम लड़े थे, मैं उसे सॉरी कहना चाहता हूँ लेकिन.......
    राकेश आकर मेरे पास बैठ गया है, 'हम तो मिलते रहेंगे, ज्यादा दूर थोड़ी रहते हैं.'(फिर पूरे 3 साल बाद हम मिले!) अमित की packing हो गई है (..और उस packing के साथ उसे आज तक झेल रहा हूँ, मेरा अभी भी roommate है) अरविन्द कि 'मडिया पार्टी' तैयार है (उस दिन से अबतक नहीं मिला 'अरविन्द दाऊ' से). श्री कान्त, जिसके साथ मैंने 6th में बहुत रोया है प्रवीण के साथ बैठा कुछ सोच रहा है (इनसे भी 5 साल से नहीं मिला). बहुत से Juniors रूम में आ गये है, किसी ने मेरी पेंसिल ले ली है, किसी ने पेन. मैं रूम से उठ कर भाग आया.प्रसाद सर के घर तक गया, लेकिन उनका दरवाजा खटखटाने कि हिम्मत नहीं हुयी. बाहर से ही लौट आया.
......पापा आ गये हैं, घंटे भर में मैं जा रहा हूँ. आते वक़्त भी आँसू थे, जाते वक़्त भी हैं.....पहले घर जाने को रोता था, अब घर जाने पर रो रहा हूँ.

feb 2011.....
लगभग सबका placement हो चुका है, सब कहीं ना कहीं चले जायेंगे, सब खुश है, engineering ख़त्म होने पर...मैं भी. लेकिन फिर वही कहानी दुहराई जाएगी, सब अलग-अलग हो जायेंगे. हमारी gang टूट जाएगी. मैं और यश दिन में 4 बार मिलते हैं, और अब वो कहीं और, मैं कहीं और...... अमित भी अब roommate कहाँ रहेगा!कॉलेज में 'आरक्षण' फिल्म कि शूटिंग चल रही है......असली ज़िन्दगी भी तो फिल्म के जैसी ही है, लेकिन एक Circle की तरह पुरानी चीजें यहाँ बार-बार दुहराती हैं!

Friday, February 4, 2011

........ये नींद टूटे ख्वाब ही दिखाती है!!

तुमने छुआ मुझे फिर....वैसे ही उन्नींदे.
जैसे, तारकों के बीच से,
कोई नई आकाश गंगा चमक उठी हो.
या गंगासागर तक का सफ़र गंगे ने
कर लिया हो तय, पल में ही.

चाँद शक्ल बदलता रहा, हर रात....अनवरत.
लेकिन तुम नहीं बदले,
इत्तेफाकन, देखो मैं भी नहीं बदला!!
सच तो ये है, तुम्हारी चाह ने मुझे बदलने नहीं दिया,
और तुम्हें तुम्हारे अहं ने.
मैं अब भी वहीं हूँ, तुम्हारी आस में.
तुम अब भी वहीं ठहरे बेगानी तलाश में!

तुमने छुआ मुझे फिर....वैसे ही उन्नींदे,
नींद के आगोश में, मैंने भी.
तुम्हें नहीं लगता, ये नींद टूटे ख्वाब ही दिखाती है.
जो सपने सच हो जाते हैं, वो नींद में कहाँ आते हैं!

Aarakshan (film)

Deepika Padukode in my colllege. yup. meine dekha,live!! She is b'ful, but not much, little lesser than my girl friend :))..... from Prakash Jha to Amitabh Bachchan, everyone were present in my college and students were treating them like VVVV......(1000 times) IP special (everyone wanna job Jr. artist in the movie).
seen: Deepika walking in the canteen..
take first-
She walked, one of Jr. artist came between.........cut, retake.

take two-
she walked, but not properly.......cut, retake

take third, fourth ,fifth, sixth, seventh.........

just boring......retake, retak, retake........!!!!!

Bechara mei bhag khada hua (film banana itna aasan nhi hai bidu)........Prakash Jha (director, directing this film 'Arakshan') kaise jhelta hoga!!

There is difference b/w Amitji and others (include Saif Ali, Deepika, Manoj Bajpai ).... the difference in treatment, everyone was (from crew) was treating Amitji as PM and others as AAM AADMI.

watch my college (film ki 40% shooting mere college se hai), watch Aarakshan film in september. :))

I am also in a seen........and my Jrs are in many. ::p

Monday, January 31, 2011

BakBak

मैंने एक बात सीखी, the great Indian thinking, एक गवर्मेंट Teacher महीने भर स्कूल नहीं जाता है, और बुराई सिस्टम की करता है, की यहाँ शिक्षा का स्तर डाउन हो रहा है. मध्य प्रदेश में पहली बार किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं, और हमारे कृषि मंत्री ( जो खुद ही Agricultural Science से Ph. D हैं) का कमेन्ट आता है कि ''किसान अपने  किये की सजा भुगत रहे हैं. पहले विदेशी खाद का उपयोग किया और धरती बंजर कर दी.'' वाह भाई वाह! मान गये, साल्ला गलतियां खुद करो, गन्दी policies तुम बनाओ, ओला राहत का पैसा अपने रिश्तेदारों को तुम खिलाओ और जब बेचारे पेट के मारे लोग खुद को मारने लगे तो अपनी बेहूदा सी बकबक लेकर शुरू हो जाओ. इन राजनेतिक गधों के कुत्तेपन की कोई हद ही नहीं है. आज राजधानी में मेला लगा, 'अन्त्योदय मेला' सारे प्रदेश के लोग आये एक hope के साथ की कुछ benifit तो मिलेगा उन्हें, और पता है हमारे CM ने उन्हें क्या दिया??  ठेंगा......किसी को कुछ भी नहीं, इन पीड़ितों के लिए सरकार  के  पास कुछ भी नहीं है.निकम्मी सरकार के निकम्मे लोग अच्छाई का मुखोटा लगाये सरकार चला रहे हैं और लोग यहाँ ये सहने पर मजबूर हैं.

 केंद्र में एक साहब ने १.७६ लाख करोड़ का घोटाला किया हुआ है, साल्ले को पता भी नहीं होगा की कितने शून्य होते हैं इसमें. विदेश मंत्री की कुर्सी पे एक येसा बंदा बैठा है जो अपने घर के relations पड़ोसियों के साथ भी नहीं सम्हाल सकता, देश के क्या सम्हालेगा. लोगों का कहना है SC है तो रिवार्ड दिया है, विदेश मंत्रालय के रूप में, जैसे साल्ला विदेश मंत्रालय मंत्रालय ना होकर लड्डू-पेडा हो गया हो, किसी नौकर ने अच्छा काम किया तो दो पेड़े और दे दिए.......भैया देश की बात हो रही है, मजाक नहीं, पूरे  सौ करोड़ लोगों का सबाल है तो मंत्रालय येसे ही कैसे बाँट सकते हैं. नीता रादिया जैसे लोबिस्ट यहाँ भाग्य विधाता बन गये हैं और NDTV जैसे chennels मंत्री बना रहे हैं, जैसे सरदार जी (PM) की औकाद कुछ भी नहीं है, वो सिर्फ स्टंप ले के बैठे हैं, आओ मिलो तो तुमपर भी ठप्पा लगा देंगे. किसी देश के प्रमुख नेता को इतना बेचारा मैंने कभी नहीं देखा ना ही इतिहास में पढ़ा है.
 
तंग आ गया हूँ में इन सब से, इस कीचड से, इस गन्दी व्यवस्था से. पिछले महीने के विधानसभा सत्र के pass रखे रहे मेरे पास, लेकिन मैं नहीं देखने गया, साल्ला इन जुटे-चप्पल फेंकते असभ्यों को देखने का मन ही नहीं किया, और मैंने वही pass बगल बाले अंकल को दिया तो वो ऐसे चहके जैसे लाइफ टाइम  ऑफर मिल रहा हो.

इनके कुत्तेपन ने संन्यास लेने को मजबूर कर दिया है, atleast सोचने पर मजबूर तो कर ही दिया है.
 
मेरे पापा आये हुए हैं, मुझसे मिलने. अगली बार दुनिया भर पिताओं के ऊपर...........

Sunday, January 23, 2011

Mumbai Diaries (Dhobi Ghat), review and more....

हर Movie में कोई ना कोई किरदार मुझे अपने करीब लगता है, और 'धोबी घाट' का अरुण तो मुझे अपने बिलकुल करीब लगा. वो Artist है, serious है लेकिन Simple भी. कभी वो इतना फालतू है कि यास्मिन के Video घंटो देखता रहता है और कभी इतना Busy कि Paintings से वक़्त ही नहीं मिलता. वो जिस तरह से Serious होकर सोचता है मुझे अच्छा लगता है. उसकी creativity को Area चाहिए, broad एरिया. इसीलिए उसे पुरानी मुंबई में फ्लैट चाहिए. ऐ फिल्म ही किसी epic के पहले अध्याय कि तरह है या किसी महाकाव्य के कुछ अधूरे पन्नों कि तरह जिसके बाकी पन्ने लिखना कवि भूल गया हो. मुन्ना बिलकुल मासूम है, बोलते वक़्त आँखे मिचकाता है, और एक ही वाक्य में बात ख़त्म कर देता है. ...और उसका वो कहना, कि वो दरभंगा बिहार से है, लेकिन घर कि याद नहीं आती क्यूंकि वहां उसे खाने कम मिलता था. मुंबई पता नहीं कितनों के लिए  एक स्वप्न कि तरह है, जाने कितने लोग यहाँ आये और मुन्ना कि तरह ही झुग्गियों में लगभग जानवरों सी ज़िन्दगी जी रहे हैं. मुन्ना चूहे भी मारता है (मुझे अभी पता चला कि गवर्मेंट ने झुग्गियों में चूहे मारने बाले लगा रखे हैं, जिससे प्लेग ना फैले.) और उसे अपने इस काम से नफरत है. लेकिन उसे 'शाई' से प्यार हो गया है. 'शाई' कुछ अजनबी सी है, खुद से ही. banker है लेकिन शौक Photography है. साईं को अरुण से पहली बार में ही प्यार हो गया जैसे उसे भी किसी कि तलाश थी जो उसी कि तरह अधूरा हो. उसे शायद US की साफ़ सड़के अच्छी नहीं लगी इसीलिए Shining India में असली भारत की तस्वीर ले रही है. और सबसे अहम् 'यास्मिन की दीदी' के वो चार विडियो ख़त..पूरी कि पूरी फिल्म उन्ही पे टिकी है. ज़िन्दगी कि जंग में कभी अरमान हमपर भारी होते हैं, कभी ज़िन्दगी और कभी अवसाद. जब अवसाद भारी होते हैं तो हम जंग हारना शुरू कर देते हैं. कितने अरमान के साथ उसे उसके माँ-बाप ने एक मुम्बईया से ब्याह था और वही उसकी ज़िन्दगी ले गया. उसकी आत्महत्या एक हत्या ही तो थी.
       ज़िन्दगी  में सपने पाल लो तो वे हमे अपनी ज़िन्दगी जीने नहीं देते और पूरे हो जाएँ तो बस जीवन ही जी लिया, एक पल में ही. कितनों के सपने ढल गये, कितनों के बह गये. लेकिन मुंबई वहीं खड़ा है, सागर किनारे अपने से बतियाता. Mumbai Diaries यही है, एक क्षितिज जो सपनों को दर्दनाक हकीकत से मिलवाता है.  किरण राव तुम्हें सलाम!